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हरिद्वार में दरकते पहाड़ से खतरे की जद में हजारों की आबादी
रतनमणी डोभाल, अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 10 Aug 2018 08:00 AM IST
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हरकी पैड़ी क्षेत्र में दरकते पहाड़ से हो रहा भूस्खलन हजारों की आबादी के लिए खतरा बना हुआ है। चट्टानें गिरने पर सरकारी तंत्र में दिखने वाली बेचैनी खतरा टलती है शांत हो जाती है।
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शिवालिक पर्वतमाला का कई बार अध्ययन हो चुका है। ट्रीटमेंट के लिए खूब बातें हुई, लेकिन नतीजा सिफर है। दो दिन पहले दुकानों पर गिरी चट्टानों से साफ है कि कभी भी पहाड़ शहर के बड़े हिस्से पर कहर बरपा सकता है। 14 अगस्त 2007 को हिल बाईपास से बरपी तबाही के बाद से इस शिवालिक पर्वतमाला के ट्रीटमेंट की बातें चल रही हैं। विशेषज्ञों से कई बार पहाड़ की स्थिति का अध्ययन और परीक्षण कराया जा चुका है।
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अगस्त 2010 की तबाही के बाद ट्रीटमेंट के बड़े बड़े दावे हुए, लेकिन किया कुछ नहीं किया गया। विशेषज्ञों के पहाड़ के साथ बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप पर रोक लगाने की सलाह भी दरकिनार की गई। इसी का नतीजा है कि ब्रह्मपुरी से लेकर रामगढ़ खड़खड़ी और भीमगोडा नई बस्ती को खोदकर अवैध निर्माण किया जा रहा है। जबकि आठ साल पहले तहसील प्रशासन ने इस क्षेत्र में 92 परिवारों को भवन खाली करने के लिए नोटिस थमाए थे।
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दूसरी तरफ राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र है। इस क्षेत्र में मानव प्रवेश पर प्रतिबंध है, लेकिन ब्रह्मपुरी, भीमगोडा नई बस्ती, रामगढ़ आदि क्षेत्र में लोग पार्क के अंदर तक घुस चुके हैं। हरकी पैड़ी के पास ही हनुमान मंदिर, कपूरथला हाउस के सामने पहाड़ खोद कर कई दुकानों का निर्माण किया गया है। जोगिया मंडी, पीडब्ल्यूडी निरीक्षण भवन के आसपास रेलवे सुरंग के ऊपर तक भारी भरकम अवैध निर्माण इस अवधि में किया गया है। ऐसे में जब भी पहाड़ दरका तो हरिद्वार शहर की आबादी का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ जाएगा।
पहाड़ में नहीं है ठोस चट्टानें
शिवालिक पहाड़ की संरचना ठोस चट्टानों वाली नहीं है। आईआईटी रुड़की के जियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों से इसका अध्ययन कराया था। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक पहाड़ कच्चा और रेतीला है। इसके बाद पहाड़ को संरक्षित और सुरक्षित बनाने के लिए इटली की विशेषज्ञ कंपनी मेकाफेरी को लाया गया। कंपनी ने अध्ययन कर ट्रीटमेंट का प्रपोजल भी सरकार को दिया था। कंपनी के सुझाव पर हिल बाईपास पर कुछ काम कराया भी गया। जहां पर सड़क बार-बार टूट कर भीमगोडा पहुंच जाती थी उस जगह पर स्टील पुल का निर्माण अर्द्धकुंभ 2016 में ही कराया गया है।
- आरपी नैथानी सहायक अभियंता पीडब्ल्यूडी