कोकाकोला पर उत्तराखंड के CM का 'मन डोला'
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सितारगंज में सिडकुल फेज टू में कोकाकोला को जमीन दिए जाने के मसले पर अब रातव सरकार यू टर्न लेती दिख रही है।
सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसके संकेत दिए। मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि प्रदेश में पर्यावरण और रोजगार को तवज्जो देने वाले उद्योगों को ही प्रदेश में उद्योग स्थापित करने की अनुमति दी जाएगी।
तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के समय में छरबा में कोकाकोला को प्लांट लगाने के लिए जमीन दी गई थी। स्थानीय स्तर पर विरोध होने और पर्यावरण संगठनों के विरोध के बाद सरकार को इसमें कदम वापस खींचने पड़े थे।
कंपनी का विरोध ही इस बात को लेकर था कि कोकाकोला के उत्पादन में अत्यधिक भू जल का दोहन होता है। पर्यावरण के आधार पर हुए इस विरोध को देखते हुए बाद में इस कंपनी को सिंतारगंज में सिडकुल फेज टू में जमीन देने की बात की जा रही है।
सितारगंज में जमीन देने पर पुनर्विचार
पर अब इस पर प्रदेश सरकार का मन बदलता दिख रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्पष्ट तो नहीं किया पर इस बात का संकेत जरूर दिया कि कोकाकोला को सितारगंज में जमीन देने पर सरकार अब पुनर्विचार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाले उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बड़े उद्योगों की जगह प्रदेश में छोटे उद्योगों को तवज्जो दी जाएगी।
प्रदेश की अपनी विशेष परिस्थितियों में छोटे उद्योग ही प्रदेश को विकास की राह पर आगे ले जा सकते हैं। बड़े उद्योगों में निवेश अधिक है पर रोजगार की जरूरत को छोटे उद्योग ही पूरा कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बड़े उद्योगों ने प्रदेश में रोजगार की जरूरत को पूरा नहीं किया। प्रदेश में कुशल श्रम की कमी है और ऐसे में उद्योगों में प्रदेश के स्थानीय कुशल श्रम को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश अपनी जरूरतों पर फोकस करेगा।