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संजोना तो दूर, विरासतों तक पहुंचना भी मुश्किल
विनीत शर्मा-मनीष त्रिपाठी/ अमर उजाला, साहिया-विकासनगर
Updated Mon, 18 Apr 2016 11:23 AM IST
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लाखामंडल
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देहरादून जिले के अनेक शिलालेखों, इमारतों और पुस्तकों के रूप में संजो कर रखने का जिम्मा भारतीय पुरातत्व विभाग के पास है। लेकिन विभागीय उपेक्षा के कारण आज यही विरासत नष्ट हो रही है।
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देहरादून जिले के पछवादून की धरोहरों की बात की जाए तो इसका इतिहास से पुराना नाता रहा है। तीसरी शताब्दी में राजा शीलवर्मन द्वारा कराए गए अश्वमेध यज्ञ के प्रमाण यहां पर खुदाई में मिली यज्ञ वेदिकाओं के रूप में साफ देखे जा सकते हैं। वहीं अशोक सम्राट ने बौद्ध धर्म से जुड़े उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिन शिलालेखों का सहारा लिया उनमें से एक यहीं पर है। लेकिन यहां पहुंचने वाले मार्ग भी खस्ताहाल है।
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गुमनामी में है अश्वमेध यज्ञ स्थल
बाड़वाला के निकट जुड्डो मोटर मार्ग से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित जगतग्राम अश्वमेध यज्ञ स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। राजा शीलवर्मन ने तीसरी शताब्दी में यहां अश्वमेध यज्ञ करवाया था। लेकिन प्रचार प्रसार के अभाव में यह स्थल गुमनामी के साए में है। हालांकि इसके रखरखाव का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है। बावजूद इसके न तो इस स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सड़क है और न ही यहां पर इन वेदिकाओं के ऊपर किसी शेल्टर का निर्माण किया गया है। हाल यह है कि यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को एक किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इसी के साथ देखरेख के अभाव में पक्की ईटों से निर्मित इन यज्ञ वेदिकाओं में से कई ईटें अब उखड़ने लगी है।
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अशोक शिलालेख का मार्ग क्षतिग्रस्त
उत्तर भारत में महज एकमात्र कालसी ही ऐसा स्थान है जहां अशोक के चर्तुदश शिलालेख प्राप्त हैं। ऐसे में इस स्थान का अपने आप में ही एक अलग स्थान है। बावजूद विभाग इस स्थल के प्रचार-प्रसार में कोई ध्यान नहीं देता। जिन उपदेशों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए अशोक ने कालसी में शिलालेख की नींव रखी आज उसी शिलालेख तक पहुंचने वाला मार्ग जर्जर हाल पड़ा है। रास्ते में कूड़े के अंबार हैं। शिलालेख तक पहुंचने के लिए कोई लैंड मार्क भी नहीं है।
खस्ताहाल है लाखामंडल की सड़क
लाखामंडल स्थित शिवलिंग आठवीं शताब्दी का बताया जाता है। जिसके रखरखाव का जिम्मा भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है। लेकिन इस स्थान तक पहुंचने के लिए भी लोगों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़क खराब होने के कारण यहां तक पहुंचने के लिए लोगों को हिचकोले भरा सफर तय करना पड़ता है। लाखामंडल का संबंध महाभारत काल की उस घटना से बताया जाता है, जिसमें कौरवों ने पांडवों और उनकी माता कुंती को मारने के लिए लाक्षागृह का निर्माण किया था।
अशोक शिलालेख के रास्ते पर सफाई रखने की जिम्मेदारी आसपास के लोगों की भी है। ऐसे में यहां पर जागरूकता के लिए समय-समय पर सफाई अभियान चलाए जाते रहते हैं। अश्वमेध यज्ञ स्थल को रास्ता बनाए जाने के लिए आसपास के ग्रामीणों से जमीन देने के लिए वार्ता चल रही है। लाखामंडल को जाने वाले रास्ते की हालत सुधारने का काम चल रहा है।
- डा. केसी नौरियाल अधीक्षण पुरातत्वविद्द भारतीय पुरातत्व विभाग