राखी बांधने से पहले बहनें जान लें, कब है शुभ मुहूर्त
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रक्षाबंधन का पर्व 29 अगस्त को है। भद्रा की वजह से इस बार रक्षाबंधन का पर्व दोपहर 1 बजकर 40 मिनट के बाद ही मनाना शुभ माना जा रहा है। श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहन का यह त्योहार मनाया जाता है।
रक्षाबंधन भद्रा रहित अपराह्नकाल व्यापिनी पूर्णिमा में मनाने का विधान है। भविष्यपुराण के अनुसार अति आवश्यक परिस्थितियों में भद्रा के मुख काल को छोड़कर पुच्छकाल में बंधन आदि शुभ कार्य किए जा सकते हैं। 29 अगस्त को सुबह 10.05 से पूर्वाह्न 11.05 बजे तक भद्रा का पुच्छकाल रहेगा। यदि बेहद आवश्यक है तो इस समय रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकता है।
उत्तराखंड विद्वत सभा के उपाध्यक्ष आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार पूर्वाह्न 11.05 से दुपहर 12.35 बजे तक भद्रा मुख काल का समय है, ऐसे में रक्षाबंधन ना करें। बताया कि दोपहर 1.40 बजे के बाद ही रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त है। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार पूर्णिमा तिथि तड़के 3.30 बजे से रात्रि 11.50 तक रहेगी। भद्रा प्रात: से अपराह्न तक रहेगी। भद्रा में मंगल कार्य करना अशुभ माना जाता है।
38 साल पहले 1977 में था यही योग
शनिवार, धनिष्ठा नक्षत्र, अतिगण्ड योग, विष्टि करण एवं सूर्य-चंद्र-शुक्र-राहु-केतु आदि का संयोग 38 वर्ष पूर्व 28 अगस्त वर्ष 1977 को बना था। उस दिन श्रावण पूर्णिमा थी।
मिलती है सुख-समृद्धि
रक्षाबंधन के दिन वस्त्र में केशर, सरसों, चंदन, चावल, दुर्वा रखकर रंगीन सूत की डोरी से बांधकर उसका पूजन करने के पश्चात दाहिने हाथ में बांधने से वर्षभर सुख-समृद्धि रहती है।
भाई को प्यार करने के सौ कारण
इन दिनों बहनें अपने भाईयों को प्यार करने के सौ कारण बता रही हैं। यह अलग अंदाज बयां किया जा रहा है ग्रीटिंग कार्डों के माध्यम से। दरअसल बाजार में इसी थीम के कार्ड्स आए हुए हैं, जिनमें लिखा है 11 रिजन, वाय लव यू ब्रदर।
इन कार्ड्स की खासियत यह भी है कि इनमें रोली और राखी भी साथ में है। यानी एक कार्ड खरीदकर सीधे कर दिया जा रहा है भाई को पोस्ट। इसके बाद न तो अलग से रोली खरीदने की जरूरत और न ही राखी खरीदने की। आर्चिज गैलरी में ऐसे कार्ड्स की खूब खरीदारी हो रही है।