पूर्व राज्यपाल कुरैशी की 'कृपा' पर जांच की 'आंच'
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उत्तराखंड के नए राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पॉल ने पूर्व राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी के कार्यकाल के दौरान अंतिम दिनों में लिए गए फैसलों की फाइलें तलब की हैं। संभावना है कि राज्यपाल कुछ फैसलों पर पुनर्विचार करें।
दरअसल, कुरैशी के तबादले के आदेश पर राष्ट्रपति ने 30 दिसंबर को हस्ताक्षर कर दिए थे। इसके बाद कुरैशी ने दो कुलपतियों की तैनाती फैसला लिया था। साथ ही कुछ आरोपियों को आरोप मुक्त करने की सिफारिश की थी।
राजभवन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक नए राज्यपाल ने उन फाइलों को देखने के लिए मांगा है, जिस पर अंतिम दिनों में कुरैशी हस्ताक्षर कर गए हैं। इसके अलावा अन्य लंबित मामलों की फाइलें मांगी हैं।
आमतौर पर कोई राज्यपाल पूर्व राज्यपालों की ओर से हुई नियुक्ति को निरस्त नहीं करते, लेकिन बीच में कार्यकाल समाप्त करने का अधिकार उनमें निहित है।
कोर्ट के हस्तक्षेप से बदले जा सकते हैं फैसले
विधि विशेषज्ञों की मानें तो ऐसा कोई नियम-कानून नहीं है कि राज्यपाल तबादले के आदेश आने के बाद कोई फैसला नहीं ले सकते हैं, लेकिन नैतिकता के आधार पर राज्यपाल ऐसा नहीं करते हैं।
आमतौर पर कोई राज्यपाल पूर्व के राज्यपाल का फैसला निरस्त तो नहीं करता है, लेकिन कुछ मामलों में कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद फैसले बदले गए हैं।
दरअसल, कुरैशी ने तबादला आदेश के बाद पहले औद्यानिकी व वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर कार्यवाहक कुलपति डॉ. मैथ्यू प्रसाद की नियुक्ति की, फिर उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में तीन वर्षों के लिए सतेंद्र प्रसाद मिश्र को पुन: जिम्मेदारी सौंपी है।
बताते हैं कि नए राज्यपाल दोनों नियुक्तियों की प्रक्रिया को जानना चाहते हैं। कुरैशी जेपी जोशी यौन शोषण मामले में ब्लैकमेलिंग के आरोपियों के पक्ष में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर गए हैं, जिसमें आरोपियों से मुकदमा वापसी को कहा गया है।