साहब! मेरी तो पूरी दुनिया ही टिहरी झील में समा गई
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टिहरी बांध की झील से पुनर्वासित घोंटी गांव के एक अनुसूचित जाति परिवार का 12 साल बाद भी पुनर्वास नहीं हो पाया है। प्रभावित परिवार को पुनर्वास की पात्रता निर्धारण को अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील बनने के बाद जाखणीधार ब्लाक का घोंटी गांव पूर्ण पुनर्वासित हुआ था, लेकिन गांव में निवासरत अनुसूचित जाति के किशोरी लाल का पुनर्वास नहीं हो पाया है।
किशोरी लाल के पिता को सरकार ने वर्ष 1976 गांव में 10 नाली भूमि का पट्टा दिया था। वह भी झील में डूब गई है। इसके बाद से प्रभावित परिवार नैनचामी में रिश्तेदारों के यहां शरण लिए है।
एक इंच भूमि का टुकड़ा नसीब नहीं
पात्रता निर्धारण नहीं होने का कारण बताया जा रहा है कि जिस सरकारी भूमि के खसरा नंबर से 10 नाली का पट्टा आवंटित हुआ था, वह करीब 100 नाली का है और इसका आधा हिस्सा टिहरी बांध की झील के आरएल 835 मीटर के ऊपर है।
जबकि जो भूमि किशोरी को आवंटित है, वह आरएल 835 मीटर के नीचे है। ऐसे में अधिकारी खसरा नंबर को आधार मानकर पात्रता निर्धारण से इनकार कर रहे हैं। किशोरी लाल पुनर्वास एवं राजस्व विभाग से भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर सीमांकन करने की मांग कर रहा है।
पुनर्वास के प्रभारी अधिशासी अभियंता राकेश थपलियाल का कहना है कि जल्द भूमि का सीमांकन करवाकर पुनर्वास की कार्रवाई की जाएगी।