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साहब! मेरी तो पूरी दुनिया ही टिहरी झील में समा गई

Sun, 07 May 2017 08:11 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई टिहरी Updated Sun, 07 May 2017 08:11 PM IST
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kishorilal told his story of rehabilitation about tehri jheel

टिहरी बांध की झील से पुनर्वासित घोंटी गांव के एक अनुसूचित जाति परिवार का 12 साल बाद भी पुनर्वास नहीं हो पाया है। प्रभावित परिवार को पुनर्वास की पात्रता निर्धारण को अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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वर्ष 2005 में टिहरी बांध की झील बनने के बाद जाखणीधार ब्लाक का घोंटी गांव पूर्ण पुनर्वासित हुआ था, लेकिन गांव में निवासरत अनुसूचित जाति के किशोरी लाल का पुनर्वास नहीं हो पाया है।
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किशोरी लाल के पिता को सरकार ने वर्ष 1976 गांव में 10 नाली भूमि का पट्टा दिया था। वह भी झील में डूब गई है। इसके बाद से प्रभावित परिवार नैनचामी में रिश्तेदारों के यहां शरण लिए है। 

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एक इंच भूम‌ि का टुकड़ा नसीब नहीं

kishorilal told his story of rehabilitation about tehri jheel

​पात्रता निर्धारण नहीं होने का कारण बताया जा रहा है कि जिस सरकारी भूमि के खसरा नंबर से 10 नाली का पट्टा आवंटित हुआ था, वह करीब 100 नाली का है और इसका आधा हिस्सा टिहरी बांध की झील के आरएल 835 मीटर के ऊपर है।

जबकि जो भूमि किशोरी को आवंटित है, वह आरएल 835 मीटर के नीचे है। ऐसे में अधिकारी खसरा नंबर को आधार मानकर पात्रता निर्धारण से इनकार कर रहे हैं। किशोरी लाल पुनर्वास एवं राजस्व विभाग से भूमि का स्थलीय निरीक्षण कर सीमांकन करने की मांग कर रहा है।

पुनर्वास के प्रभारी अधिशासी अभियंता राकेश थपलियाल का कहना है कि जल्द भूमि का सीमांकन करवाकर पुनर्वास की कार्रवाई की जाएगी। 

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