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किशाऊ में उत्तराखंड और हिमाचल साथ-साथ
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 17 May 2015 10:34 AM IST
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किशाऊ बहुउद्देशीय जल विद्युत परियोजना पर आखिर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार में आम सहमति बन गई है।
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660 मैगावाट की परियोजना के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभों में दोनों राज्यों में बराबर की हिस्सेदारी रहेगी। समझौते के तैयार ड्राफ्ट में परियोजना से जुड़ने वाली डाउन स्ट्रीम (अन्य छोटी पांच परियोजनाओं) में विद्युत उत्पादन की हिस्सेदारी पर मतभेद सुलझा लिये गए हैं।
परियोजना से डाउन स्ट्रीम में जितना उत्पादन बढ़ेगा उसका पचास फीसद हिमाचल प्रदेश को मिलेगा। ड्राफ्ट पर दोनों राज्यों की कैबिनेट की मुहर के बाद परियोजना का एमओयू (समझौता पत्र) साइन होगा।
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किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना निर्माण के लिए संयुक्त उपक्रम बनाने के लिए शनिवार को हिमाचल प्रदेश मुख्य सचिव पी मित्रा और उत्तराखंड के मुख्य सचिव एन रविशंकर के बीच सचिवालय में बैठक हुई।
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10500 करोड़ की किशाऊ राष्ट्रीय परियोजना से पांच राज्यों को लाभ मिलना है, लेकिन लंबे समय से परियोजना से होने वाले विद्युत उत्पादन को लेकर मामला लटका हुआ था। प्रधानमंत्री कार्यालय की मध्यस्तता में तीन दौर की बैठक हुई जबकि दो दौर की वार्ता हिमाचल और उत्तराखंड के मुख्य सचिवों के बीच हो चुकी है।
शनिवार को हुई बैठक में परियोजना के संयुक्त उपक्रम बनाने के लिये एमओयू ड्राफ्ट पर दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव एन रविशंकर ने बताया कि ड्राफ्ट पर आम सहमति बन गई है। इसे दोनों राज्यों की कैबिनेट से मंजूरी के लिए रखा जायेगा।
कैबिनेट से अनुमोदन के बाद उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में एमओयू पर हस्ताक्षर किया जायेगा। बैठक में अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, सचिव ऊर्जा उमाकांत पवांर और हिमाचल प्रदेश के प्रमुख सचिव ऊर्जा एसकेबीएस नेगी, एमडी हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन डीके शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
बराबर की हिस्सेदारी
- परियोजना में हिमाचल का भू क्षेत्रफल 1500 हेक्टेयर, उत्तराखंड का 1498 हेक्टेयर
- हिमाचल की वन भूमि 1321 हेक्टेयर, उत्तराखंड की 1166 हेक्टेयर
- उत्तराखंड का डूब क्षेत्र 1452 हेक्टेयर, हिमाचल का 1458 हेक्टेयर
- हिमाचल के 8 गांव डूब क्षेत्र में, उत्तराखंड के नौ गांव
यह था मुख्य विवाद
टौंस नदी पर किशाऊ बांध बनने से उत्तराखंड की पहले से चल रही पांच छोटी जलविद्युत परियोजनाओं की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी। हिमाचल प्रदेश इस बात पर जोर दे रहा था कि बढ़ी विद्युत उत्पादक क्षमता 400 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष में उसे 50 फीसदी हिस्सा चाहिए।
उत्तराखंड इसके लिए तैयार नहीं था। इन पांचों योजनाओं पर पहले से मिल रही हिस्सेदारी ही उत्तराखंड जारी रखना चाहता था। अब बढ़ी क्षमता पर बराबर की हिस्सेदारी के लिए उत्तराखंड सरकार तैयार हो गई है।
योजना का प्रारूप
- किशाऊ बांध 236 मीटर ऊंचा और 680 मीटर लंबा बनेगा
- बांध बनने से दोनों राज्यों का 2950 हैक्टेयर क्षेत्र जलमगन होगा
- बांध की क्षमता 1824 मिलियन क्यूबिक मीटर की रहेगी
- 1851 मिलियन यूनिट प्रतिवर्ष विद्युत उत्पादन
- बांध का जल हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड को मिलेगा
- निर्माण के लिए 90 फीसद धनराशि केंद्र सरकार मुहैया करवाएगी