जूना अखाड़े में शामिल हुआ किन्नर अखाड़ा, नियम और रीति-नीति को लेकर अखाड़ों के बीच अनुबंध
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प्रयागराज कुंभ में शनिवार को किन्नर अखाड़ा नागा संन्यासियों के सबसे बड़े जूना अखाड़े में शामिल हो गया। किन्नर अखाड़े आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के साथ पूरे अखाड़े ने जूना अखाड़े के मुख्य संरक्षक श्रीमहंत हरिगिरि के सम्मुख अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। हरि गिरि ने अखाड़े के बाकायदा जूना अखाड़े में विलय की घोषणा की।
गौरतलब है कि पहले ही अग्नि और आह्वान अखाड़े जूना अखाड़े के साथ स्नान करते हैं। महिला संन्यासियों का माईबाड़ा भी जूना के साथ कुंभ नहाने जाता है। श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि अब किन्नर अखाड़ा भी जूना अखाड़े का अंग बन गया है।
इस कारण यह अखाड़ा भी कुंभ के शाही स्नानों में जूना अखाड़े के साथ स्नान करेगा। उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़े को लेकर जिस प्रकार का माहौल बनाया गया था, उससे हिंदुओं के धार्मिक कार्यों में शामिल रहे किन्नरों की प्रतिष्ठा को धक्का लग रहा था।
वास्तव में यदि अखाड़ा उन्हें मान नहीं देता तो वे दूसरे धर्म में शामिल हो सकते थे। अब किन्नर अखाड़े ने वचन दिया है कि वह जूना अखाड़े के नियमों और रीति रिवाजों के अनुसार काम करेगा। अखाड़े के सभी नियमों का पालन करने का वचन किन्नर अखाड़े के प्रतिनिधियों ने दिया है।
हरि गिरि ने कहा कि भविष्य में किन्नर अखाड़े के बजाय इस अखाड़े से जुड़े हुए लोगों को जूना अखाड़े के नाम से जाना जाएगा। किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि जूना अखाड़े ने उन्हें गले लगाकर बड़ा उपकार किया है। अब हमें सभी सदस्य जूना अखाड़े की रीति-नीति और नियमों का पालन करते हुए जीवन यापन करेंगे।