किडनी फ्रॉड प्रकरण: वरिष्ठ सर्जन डॉ. श्रीवास्तव को मिली क्लीन चिट, ये है पूरा मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के अल्मोड़ा में बहुचर्चित किडनी प्रकरण की जांच में वरिष्ठ सर्जन डॉ. ओपीएल श्रीवास्तव निर्दोष करार दिए गए हैं। एक साल पूर्व नगर में हुए इस मामले ने खासा तूल पकड़ा था, कई बार उच्च स्तरीय जांच को लेकर प्रदर्शन भी हुए थे।
अब तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होने पर सूचना के अधिकार के तहत डॉक्टर को क्लीन चिट मिलने की बात पता ची। जांच रिपोर्ट में साफ लिखा है कि डॉक्टर ने अपनी योग्यता और अनुभव के आधार पर मरीज की संक्रमित किडनी निकालने का निर्णय लिया जो कि उचित था। समिति ने शिकायतकर्ताओं के बयानों में भी विरोधाभास पाया।
तहसील के सुदूरवर्ती कुंवाली नैणी निवासी खीम सिंह ने एक साल पहले जुलाई में कालिका स्थित एमएन श्रीवास्तव अस्पताल पर अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बहाने उनकी पत्नी खष्टी देवी की किडनी निकालने के सनसनीखेज आरोप लगाए थे।
मामले ने तूल पकड़ा तो डीएम के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच की। इसके बाद कुमाऊं मंडल के आयुक्त ने मामले की जांच की। 10 अगस्त 2018 को उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित हुई।
संक्रमित किडनी नहीं निकालते तो जा सकती थी मरीज की जान
तत्कालीन स्वास्थ्य निदेशक और वर्तमान में स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. आरके पांडे की अध्यक्षता में अल्मोड़ा की सीएमओ डॉ. विनीता साह और प्रो. जनरल मेडिसन डॉ. आरके सक्सेना को जांच टीम में शामिल किया गया। जांच पूरी हो गई है।
जांच में पाया गया है कि आपरेशन के दौरान किडनी संक्रमित थी, जिसे शरीर से निकालना जरूरी था। नहीं तो मरीज की जान भी जा सकती थी। संक्रमित किडनी निकालने की जानकारी रोगी के तीमारदारों को दी गई थी। आपरेशन के बाद ब्लीडिंग और संक्रमित किडनी निकालने का पूरा ब्योरा डिस्चार्ज स्लिप में दर्ज है।
निकाली गई संक्रमित किडनी का सैंपल राम मनोहर लोहिया पैथोलॉजी लैब लखनऊ में सुरक्षित होने की भी जांच में पुष्टि हुई है। सूचना के अधिकार में पाई गई जांच रिपोर्ट में अध्यक्ष डॉ. आरके पांडेय, सीएमओ डॉ. विनीता साह और अन्य के हस्ताक्षर मौजूद हैं। इस बारे फोन पर हुई बात में डीजी हेल्थ डॉ. आरके पांडेय ने जांच रिपोर्ट को निष्पक्ष और सत्य बताया है।