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नन्हे 'चिरागों' को लगी तस्करों की नजर

Mon, 10 Nov 2014 09:36 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 10 Nov 2014 09:36 AM IST
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kidnapping of children in dehradun.

देहरादून में दो साल का आकाश तीन दिन से गायब है। बाइकसवार एक पुरुष और एक महिला ने टॉफी खिलाने के बहाने नंदा की चौकी क्षेत्र से उसका अपहरण कर लिया था।

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लाडले के इंतजार में मां की आंखें पथराने लगी हैं, वहीं बेटे की तलाश ने पिता को निढाल कर दिया है। लेकिन यह कहानी सिर्फ आकाश के परिवार की नहीं है। राजधानी में 28 और ऐसे परिवार हैं, जिनके चिरागों को किसी की नजर लग चुकी है।
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डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (डीसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि मार्च से अक्तूबर तक महज आठ माह की अवधि में राजधानी से 38 बच्चे अपहृत किए जा चुके हैं। यह साफ इशारा करता है कि दून में मानव तस्करी गिरोह सक्रिय है।
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लेकिन, हैरत की बात यह है कि पुलिस और प्रशासन इस ओर कतई गंभीर नजर नहीं आता। डीसीआरबी के आंकड़े ही बताते हैं कि अब तक पुलिस सिर्फ नौ बच्चों को घर लौटा सकी है, बाकी 29 परिवार इंतजार करने पर मजबूर हैं।

गुरबत के मारे बनते हैं शिकार

बच्चों का अपहरण करने वाले गिरोह अधिकतर ऐसे परिवारों को निशाना बनाते हैं, जो पहले ही गुरबत के मारे हैं। बेहद लो प्रोफाइल इन परिवारों का अव्वल तो पुलिस तक पहुंचना ही मुश्किल होता है, पहुंच भी जाएं तो बच्चे की बरामदगी के लिए वे कोई दबाव नहीं बना पाते।

बेटियों पर खतरा

kidnapping of children in dehradun.

सूत्र बताते हैं कि गरीब परिवारों के बच्चे होने के कारण इन 29 मामलों में एक भी हाई प्रोफाइल परिवार न जुड़ा होने के कारण भी पुलिस निष्क्रिय बनी रहती है। कोई रसूखदार प्रभावित होता तो पुलिस अब तक गिरोह के गिरेबान तक पहुंच चुकी होती।

बेटियों पर खतरा
डीसीआरबी के आंकड़े साफ करते हैं कि दून की नन्ही बेटियों पर अपहरण का खतरा बेटों से ज्यादा है। आठ माह में अपहृत कुल 38 बच्चों में से 22 बालिकाएं हैं।

इनमें से छह पुलिस के प्रयासों से घर लौट आई हैं, जबकि 16 बालिकाओं का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। दूसरी ओर, अब तक लापता बालकों की संख्या 13 है।

अब तक सूनी है उस मां की गोद
पिछले साल दून महिला अस्पताल में जन्मे एक बच्चे का दूसरे ही दिन अपहरण कर लिया गया था। नौ माह कोख में रखने वाली मां बच्चे की आस में कई महीने मरणासन्न हालत में रही।

लेकिन पुलिस स्कैच जारी करने और जांच के दावे करने के बावजूद न आरोपी महिला का पता लगा सकी, न बच्चे को ही तलाश सकी। अब वह बच्चा एक साल को हो चुका होगा।

अपहरण का आंकड़ा

kidnapping of children in dehradun.

माह - अपहरण - बालक - बालिका
मार्च - 04 - 02 - 02
अप्रैल - 08 - 04 - 04
मई - 02 - 01 - 01
जून - 03 - 02 - 01
जुलाई - 08 - 01 - 07
अगस्त - 03 - 01 - 02
सितंबर - 05 - 02 - 03
अक्तूबर - 05 - 03 - 02
कुल - 38 - 16 - 22

कुछ लौट आए घर
माह - वापसी - बालक - बालिका
मार्च - 02 - 01 - 01
अप्रैल - 03 - 00 - 03
मई - 01 - 01 - 00
जून - 01 - 01 - 00
जुलाई - 02 - 00 - 02
अगस्त - 00 - 00 - 00
सितंबर - 00 - 00 - 00
अक्तूबर - 00 - 00 - 00
कुल - 09 - 03 - 06

इनका नहीं मिला सुराग

kidnapping of children in dehradun.

माह - अभी नहीं मिले - बालक - बालिका
मार्च - 02 - 01 - 01
अप्रैल - 05 - 04 - 01
मई - 01 - 00 - 01
जून - 02 - 01 - 01
जुलाई - 06 - 01 - 05
अगस्त - 03 - 01 - 02
सितंबर - 05 - 02 - 03
अक्तूबर - 05 - 03 - 02
कुल - 29 - 13 - 16

पुलिस अपहरण के मामलों पर गंभीर है। विभिन्न सेलों से भी मदद ली जाती है। पुलिस अब तक नौ बच्चों को बरामद भी कर लिया है। जो 29 बच्चे अभी नहीं मिले हैं, उनकी तलाश जारी है।
- अजय सिंह, एसपी सिटी

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