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गोरखालियों की खास पहचान है खुखरी

Sun, 25 Oct 2015 01:49 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 25 Oct 2015 01:49 PM IST
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khukhri is the identity of gorkhalies.

खुखरी गोरखलियों की खास पहचान है। खुखरी साथ हो तो किसी का डर नहीं। कहा जाता है कि बंदूक की गोली भले खत्म हो जाए, लेकिन हाथ से खुखरी का साथ ना छूटे।

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बच्चे के पैदा होने से लेकर रणभूमि में डटे जवानों तक के लिए खुखरी का विशेष महत्व है। गोरखाली समुदाय के लोग खुखरी को अपनी पहचान ही नहीं मानते, बल्कि इसे गोरक्षा का प्रतीक भी मानते हैं। खुखरी में नीचे की ओर गाय के खुर का निशान बना होता है। यही वजह है कि गोरखा लोगों को गोरक्षक भी कहा जाता है।
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गोरखाली लोग खुखरी को ना सिर्फ पूजते हैं, बल्कि मरने पर यह घाट तक जाती है। क्रिया क्रम करने वाला व्यक्ति ही इसे लेकर लौटता है। जब बच्चे का जन्म होता है तो उसे डर और बुरी नजर से बचाने के लिए तकिये के नीचे खुखरी रखी जाती है।
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लड़के की शादी होती है तो उसे कमर में खुखरी पहनाई जाती है। गोरखा समुदाय के लोग टोपियों में भी खुखरी लगाते हैं, जिसे वह शान मानते हैं। गढ़ी कैंट में अंग्रेजों के समय से खुखरी बनती आ रही है। इस वजह से इस गली का नाम लोहार गली पड़ गया है। खुखरी के बारे में गोरखा समाज के लोगों से ही जानते हैं।

कुछ खास खुखरियां
3 इंच की खुखरी- इसे टोपी में लगाते हैं। चांदी और स्टील से बनने वाली यह खुखरी छोटे बच्चों के साथ भी रखी जाती है।
18 इंच की खुखरी- यह आर्मी में फौजियों के पास रहती है।
25 इंच की खुखरी- आत्मरक्षा के लिए इसे गोरखा लोग घर में रखते हैं।
36 इंच की खुखरी- यह बलि के लिए इस्तेमाल की जाती है।

बलभद्र के हाथों में खुखरी
गढ़ी कैंट वार्ड नंबर-8 के पूर्व पार्षद अजय क्षेत्री का कहना है कि वर्ष 1840 में बलभद्र का जब अंग्रेजों के साथ युद्ध हुआ तो उन्होंने खुखरी से कई अंग्रेजों को मारा। उनकी तस्वीरों में खुखरी उनके हाथों में देखी जा सकती है।

यदि गोरखा फौजी के हाथों में सिर्फ खुखरी हो तो उसमें अलग जोश भर जाता है और वह अकेले ही कई दुश्मनों का सिर कलम करने के लिए काफी होता है।

जाति विशेष की खुखरी

दुबई में नौकरी करने वाले एनआरआई शरद कुमार श्रेष्ठ ने बताया कि उत्तराखंड में वह भले ही एक ही प्रकार की खुखरी देखते हैं, लेकिन नेपाल में जाति विशेष की अपनी-अपनी खुखरी होती है। वहां खुखरियों से ही नेपाल में बसने वाले सभी जाति के लोगों को पहचान लिया जाता है। हर किसी की खुखरी के आकार में कुछ ना कुछ अंतर होता है।


सजावटी भी है खुखरी
दुकानदार कमल चंद का कहना है कि खुखरी का अपना-अपना महत्व है। जिस तरह से एक सैनिक के हाथों में जाने के बाद खुखरी का अर्थ बदल जाता है उसी तरह से फैंसी खुखरियां भी घर को एक अलग लुक देती हैं। गोरखाली समाज के लोग घरों में सजाने के लिए विशेष तौर पर फैंसी खुखरियां बनवाते हैं। जो चांदी, स्टील आदि की बनाई जाती हैं जबकि युद्ध के लिए लोहे की खुखरी बनती है।

खुखरी हमारी पहचान

बिजनेसमैन रवि कुमार क्षेत्री का कहना है कि खुखरी गोरखा लोगों की पहचान है। विशेष मौकों पर खुखरी का पूजन किया जाता है। जिस तरह से सिख लोगों के लिए कृपाण का विशेष महत्व है, उसी तरह से गोरखा समुदाय के लिए खुखरी विशेष जगह रखती है। खुखरी से गोरखा सेना ने कई दुश्मनों के सिर कलम किए। जो व्यक्ति अपने पास खुखरी रखता है वह सुरक्षित महसूस करता है।

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