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उत्तराखंड की महिलाएं हैं 'खतरों की खिलाड़ी': राघव
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 08 Feb 2016 01:26 PM IST
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खतरों के खिलाड़ी से मुश्किल है उत्तराखंड में ट्रैकिंग करना। वहां तो सिर्फ टीवी पर देखने वालों के सामने बेइज्जती ही होगी, लेकिन यहां से तो सीधे जान ही जाएगी।
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पता नहीं बिना किसी एक्सपर्ट को लिए लोग सीधे कैसे पहाड़ो पर ट्रैकिंग को निकल पड़ते हैं। यह कहना है कलर्स चैनल पर आ रहे शो खतरों के खिलाड़ी के प्रमोशन के लिए देहरादून पहुंचे मुक्ति मोहन और राघव जुयाल का। उन्होंने पहाड़ों की महिलाओं को रियल खतरों की खिलाड़ी बताया।
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रविवार को जाखन स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में मुक्ति ने बताया कि पिछले साल जब मैं राघव के घर आई तो हम लोग तुंगनाथ गए। वहां जाना बेहद मुश्किल भरा था और साथ में कोई एक्सपर्ट भी नहीं था। यानी जरा सी असावधानी सीधे हमारी जान ले सकती थी।
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यह देखकर मैं वाकई डर गई। खतरों के खिलाड़ी में भी हम ऊंचाई पर चढ़ते हैं तो कभी पानी के अंदर स्टंट करते हैं, कभी मुंह से कीड़े उठाते हैं, लेकिन कभी मुझे डर नहीं लगा। इसकी एक वजह यह भी है कि हर समय हमारे साथ एक्सपर्ट रहते हैं।
मुक्ति ने कहा कि इस शो में कई बार राघव को पछाड़ने में मुझे बेहद खुशी हुई, क्योंकि राघव ने डांस प्लस में मेरी बहन शक्ति मोहन को बहुत चिढ़ाया था, बस अब उसी का बदला ले रही हूं। राघव ने बताया कि शो में पानी के अंदर स्टंट करते हुए तब मेरी जान अटक गई जब पानी के भीतर पाइप में मेरा पैर फिसल गया था।
मैं काफी पानी पी गया था, ऐसे में लग रहा था कि आज तो मैं गया। बताया कि इस शो में मैंने 10 किलो 600 ग्राम सांप मुंह से निकाले। जो मेरे लिए जीवन की एक बड़ी उपलब्धि बन गई।
राघव ने बताया कि जल्द ही वह नई फिल्म वायरस के लिए काम करेंगे। राघव ने उत्तराखंड की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यहां पहाड़ की महिला तो रोज की खतरों की खिलाड़ी है। कहा कि सरकार को पहाड़ों की स्थिति सुधारने के लिए काम करने चाहिए। इस मौके पर राघव की मां अल्का जुयाल, अरूण खत्री आदि उपस्थित थे।