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इन नेताओं ने की थी अवैधानिक 'कोशिश'

Mon, 21 Oct 2013 09:43 AM IST
ओमप्रकाश तिवारी/ अमर उजाला, देहरादून
ओमप्रकाश तिवारी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 21 Oct 2013 09:43 AM IST
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khanduri and nishank fail to make lokayukta

उपलोकायुक्त बनाने की पहल इससे पहले बीसी खंडूड़ी और रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में भी हुई थी। लेकिन दोनों ही मुख्यमंत्री इस पर किसी की नियुक्ति नहीं कर पाए थे।

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खंडूड़ी जहां चंद्रशेखर उपाध्याय को उपलोकायुक्त बनाना चाहते थे वहीं निशंक अजय भट्ट की पत्नी पुष्पा भट्ट को। उपाध्याय की दावेदारी का विरोध नहीं हुआ था लेकिन पुष्पा की दावेदारी का विरोध हो गया था।
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नियुक्ति की सैद्धांतिक सहमति
वर्ष 2007 में सरकार को उपलोकायुक्त पद के सृजन का ड्राफ्ट सरकार को सौंपा गया था। उपलोकायुक्त 1975 एक्ट में कुछ संशोधनों के साथ राज्य में उपलोकायुक्त पद के गठन की बात कही गई थी। वर्ष 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी ने चंद्रशेखर उपाध्याय की उपलोकायुक्त पद नियुक्ति की सैद्धांतिक सहमति दी थी।
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सरकार के प्रस्ताव का समर्थन
खंडूड़ी के तत्कालीन प्रमुख सचिव (वर्तमान में मुख्य सचिव) सुभाष कुमार ने इसका प्रस्ताव तैयार कर तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस हैदर अब्बास रजा को भेज दिया। जस्टिस रजा ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया था। प्रक्रिया लंबी चलने की वजह से उपलोकायुक्त की नियुक्ति का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में चला गया। वर्ष 2009 में फिर उपाध्याय के नाम की चर्चा उपलोकायुक्त के लिए शुरू हुई। अप्रैल-मई माह में उनकी नियुक्ति को अंतिम रूप दिया ही जा रहा था कि जून के अंत में खंडूड़ी की कुर्सी चली गई।

विधि विभाग की असहमति
जून 2009 में रमेश पोखरियाल निशंक के मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब सवा साल तक उपलोकायुक्त की नियुक्ति का मामला शांत रहा। वर्ष 2011 में फिर उपलोकायुक्त की नियुक्ति की सुगबुगाहट शुरू हुई। इस बार वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट की पत्नी पुष्पा भट्ट के नाम पर निशंक सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दे दी। लेकिन राज्य के विधि विभाग ने इस पद के लिए असहमति जता दी।

पद ही औचित्यहीन
तत्कालीन प्रमुख सचिव (न्याय) इंदिरा आशीष भी इस नियुक्ति से नाखुश थीं। लोकायुक्त एमएम घिल्डियाल ने तो उपलोकायुक्त पद को ही औचित्यहीन करार दे दिया। निशंक इस पद पर किसी की नियुक्ति कर पाते उससे पहले 11 सितंबर 2011 को उनकी कुर्सी चली गई।


तीसरी बार मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने उपलोकायुक्त पद पर राज्य लोकसेवा आयोग के सदस्य रहे डीके भट्ट की नियुक्ति करनी चाही। इसके लिए शपथग्रहण समारोह का समय भी तय हो गया था लेकिन कानूनी अड़चन के कारण ऐन मौके पर पर समारोह रद करना पड़ा।

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