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इस मार्ग से शुरू की जा सकती है केदारनाथ यात्रा
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Jan 2014 09:34 AM IST
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16-17 जून की आपदा के बाद पुनर्वास की तरह ही पर्यावरण पर्यटन भी केदारघाटी में मदद की इंतजार में है।
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चौमासी और मदमहेश्वर से केदारनाथ ट्रैक अब क्षेत्र के लोगों के लिए उम्मीद की तरह है। इसके उलट स्थिति यह है कि चौमासी के ही कई युवा ट्रैक रूट का नक्शा लेकर पिछले कई सालों से भटक रहे हैं पर इनको निराशा ही हाथ लगी है।
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सोनप्रयाग के पास से 22 किलोमीटर का ट्रैक
जून माह की आपदा से पहले केदारनाथ का रास्ता गौरीकुंड से होकर जाता था। पर आपदा ने गौरीकुंड पहुंचने का रास्ता भी बंद किया और गौरीकुंड से रामबाड़ा होकर केदारनाथ पहुंचने का रास्ता भी। अब कोशिश सोनप्रयाग के पास से करीब 22 किलोमीटर का ट्रैक कर केदारनाथ पहुंचने की है।
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लोक निर्माण विभाग इस काम में जुटा हुआ है और अप्रैल तक पैदल मार्ग तैयार हो जाने का दावा भी किया जा रहा है। हालांकि इस ट्रैक को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। पहले का 14 किलोमीटर का रास्ता मंदाकिनी नदी के एक किनारे से था और अब यह दूसरे किनारे से है।
इस नए ट्रैक में खड़ी चढ़ाई का सामना भी लोगों को करना पड़ सकता है। दूसरी और चौमासी गांव के ही कई युवा चौमासी से केदारनाथ के ट्रैक को ज्यादा आसान मान रहे हैं। इनका कहना है कि यह ट्रैक बुग्यालों के बीच से होकर जाता है और नदी से दूर भी है।
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इस ट्रैक का इस्तेमाल गांव के लोग खुद भी करते रहे हैं और केदारघाटी में इस बार की भारी बरसात से भी इस ट्रैक को कोई नुकसान नहीं हुआ। चौमासी के ही सतीश तिंदौरी के मुताबिक वे पिछले पांच साल से इस ट्रैक को अपनाए जाने के लिए कोशिश कर रहे हैं पर सफलता नही मिल पाई।
शुरू की जा सकती है पैदल यात्रा
दूसरी ओर नया ट्रैक करीब 22 किलोमीटर का है और चौमासी से होकर जाने वाला ट्रैक करीब 24 किलोमीटर का है। चौमासी तक सड़क है और चौमासी से ही यह पैदल यात्रा शुरू की जा सकती है।
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इसी तरह गोंदार गांव के लोग भी मदमहेश्वर से केदारनाथ की यात्रा कराए जाने पर जोर दे रहे हैं। गांव के प्रधान भगत सिंह पंवार के मुताबिक हर साल गोंदार से मदमहेश्वर की यात्रा पर लोग जाते हैं। मदमहेश्वर से केदारनाथ का ट्रैक है और इसका उपयोग किया जाता रहा है।
आपदा से पहले तक मदमहेश्वर घाटी की आजीविका का एक आधार मदमहेश्वर यात्रा भी रहा है। गोंदार पर्यटन गांव भी घोषित है पर सरकार के नक्शे में फिलहाल इसके लिए जगह नहीं बन पाई है।