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शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर में विराजे भगवान केदारनाथ, अगले छह महीने यहीं होगी पूजा
Fri, 01 Nov 2019 08:30 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऊखीमठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ऊखीमठ
Published by: अलका त्यागी
Updated Fri, 01 Nov 2019 08:30 AM IST
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बाबा केदार की डोली
- फोटो : अमर उजाला
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भगवान आशुतोष के ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग बाबा केदारनाथ की भोगमूर्तियों को शीतकालीन पूजा-अर्चना के लिए ओंकारेश्वर मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया है। इस अवसर पर केदारघाटी सहित अन्य जगहों से भारी संख्या में पहुंचे शिव भक्तों ने बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा क्षेत्र बाबा के जयकारों से गूंज उठा। अब, छह माह तक बाबा केदार की पूजा यहीं पर होगी।
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स्थानीय वाद्य यंत्रों और 10-जेकेलाई के बैंड धुनों और भक्तों के जयकारों के बीच पूर्वान्ह 11.30 बजे भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली पंचकेदार शीतकालीन गद़्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर परिसर में पहुंची। यहां पर भक्तों ने आराध्य का फूल-मालाओं के साथ भव्य स्वागत किया। मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद उपरांत ओंकारेश्वर मंदिर के पुजारी शिव शंकर लिंग ने भगवान केदारनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली की आरती उतारी।
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इस मौके पर रावल भीमाशंकर लिंग ने भोगमूर्तियों को डोली से उतारा। आचार्य विश्वमोहन जमलोकी, यशोधर मैठाणी, स्वयंबर सेमवाल ने वेद मंत्रों के साथ बाबा केदार के आह्वान के साथ केदारनाथ के पुजारी केदार लिंग ने भोगमूति को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया। इस दौरान सभी धार्मिक औपचारिकताओं का निर्वहन किया गया। रावल द्वारा शिव भक्तों को केदारनाथ से लाया गया उदक जल और भष्म को प्रसाद रूप में वितरित किया गया। इससे पूर्व सुबह 8.30 बजे बाबा केदार की चल विग्रह डोली ने काशी-विश्वनाथ मंदिर से प्रस्थान किया। विद्यापीठ होते हुए डोली सुबह 10 बजे जयवीरी पहुंची।
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यहां पर ग्रामीणों ने आराध्य का स्वागत करते हुए सामूहिक अध्र्य लगाया। कुछ देर विश्राम के बाद बाबा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास के लिए प्रस्थान करते हुए 10.30 बजे देवदर्शनी पहुंची। यहां पर भक्तों ने पुष्प-अक्षत के साथ आराध्य का स्वागत किया। इसके बाद भक्तों के जयकारों के साथ बाबा की डोली ने पंचकेदार गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में प्रवेश किया। इस मौके पर बीकेटीसी के उपाध्यक्ष अशोक खत्री, पूर्व विधायक शैलारानी रावत, कार्यधिकारी एनपी जमलोकी, प्रशासनिक अधिकारी राजकुमार नौटियाल, मंदिर सुपरवाइजर युद्धवीर पुष्पवाण, पूर्व प्रमुख लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, आचार्य हर्ष जमलोकी, बबलू जंगली, नपं अध्यक्ष विजय राणा, ग्राम प्रधान संदीप पुष्पवाण, सभासद रवींद्र रावत, प्रदीप धरम्वाण, रीता पुष्पवाण समेत अन्य मौजूद थे।