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आपदाः काश इन्हें भी होता 'चांद' का दीदार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 23 Oct 2013 08:47 AM IST
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केदारघाटी की आपदा को चार माह बीते चुके हैं, लेकिन इसके जख्म अब भी ताजा हैं।
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आपदा में कइयों ने अपनों को खोया तो कुछ को अपनों के लौटने का आज भी इंतजार हैं। इनमें कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें अपने सुहाग के लौटने का पूरा यकीन है। इसी बिना पर इन्होंने मंगलवार को करवाचौथ का व्रत रखा और पति की लंबी उम्र की कामना की।
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गुप्तकाशी में होटल में काम करते थे
नई बस्ती के गुरु रोड पर दुर्गा मंदिर के पास एक छोटी सी गली में नीरू रस्तोगी दो बेटियों के साथ रहती हैं। बड़ी बेटी 11वीं की छात्रा है। नीरू के पति विजय रस्तोगी गुप्तकाशी में एक होटल में काम करते थे।
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चारधाम यात्रा सीजन शुरू होने पर मालिक ने कुछ अन्य कारिंदों के साथ उन्हें केदारनाथ भेजा था। विजय ने थोड़ा सा काम चालू करने के बाद वापस आने का वादा किया था। विजय तो नहीं आए, अलबत्ता आपदा की खबर आई।
आंखें फिर नम हुई
रोज पति को याद कर नीरू बेचैन होती ही थी लेकिन करवाचौथ पर उनकी आंखें फिर नम हो गईं। इस आशा में कि पति एक न एक दिन लौट आएंगे उन्होंने दिन में व्रत रखा और रात को चांद देखने के बाद पति की तस्वीर देखकर उनकी लंबी उम्र की दुआ मांगी।
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