कारगिल दिवस: ऐसा जिला जहां के 38 वीर सैनिक ले चुके हैं कीर्ति व शौर्च चक्र सहित कई सम्मान
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जिंदा रहने के मौसम बहुत मगर, जान देने की ऋतु रोज आती नहीं...हिंदी फिल्म 'हकीकत' के गीत की ये पक्तियां देश पर मर-मिटने वाले जनपद रुद्रप्रयाग के वीर रणवांकुरों के शौर्य और पराक्रम को बयां करती हैं।
भारत माता की सीमाओं की रक्षा के लिए 51 वीर जवान अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, जिसमें तीन जवान कारगिल युद्ध में भी शहीद हुए थे। भारतीय सेना ने जिले के 38 वीर सैनिकों को कीर्ति व शौर्च चक्र सहित अन्य सम्मान से नवाजा है।
केदारघाटी, क्यूंजा घाटी, मंदकिनी घाटी, मद्महेश्वर व तुंगनाथ घाटी सहित रानीगढ़, धनपुर, बच्छणस्यूं और तल्लानागपुर को संजोए रुद्रप्रयाग जनपद के प्रत्येक गांव का भारतीय सेना से सीधा संबंध है। यहां के कम से कम 15 फीसदी परिवारों का एक-एक सदस्य सेना से जुड़ा हुआ है।
शहीदों के गांव के लिए की गई घोषणाएं फाइलों में कैद
लेकिन आज भी कई सैनिकों के गांवों को मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। कारगिल युद्ध में शहीद हुए बेंजी-कांडई के सुनील दत्त कांडपाल के गांव के लिए की गई घोषणाएं फाइलों में कैद हो गई हैं। क्यूंजा के भगवान सिंह हो चाहे देवर गांव के गोंविद सिंह के गांव के लोगों को भी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं।
शहीद के भाई केके कांडपाल बताते हैं जीआईसी कांडई का नाम शहीद के नाम पर रखने की घोषणा हवाई साबित हुई है। विभाग व प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। इधर, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आर रवि थापा ने बताया कि वीर सैनिकों के आश्रितों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए नि:शुल्क कंप्यूटर कोर्स व अन्य प्रशिक्षण भी कराए जाते हैं।
रुद्रप्रयाग जनपद के शहीद
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में 2, 1965 व 1971 भारत-पाक युद्ध में 7, ऑपरेशन रक्षक में 13, पवन में 8, पराक्रम में 7, विजय में 3, मेघदूत में 3, कैकटस लिली में 3, रेनू में 1, औलम्पस में 1, बेटल एक्स में 1, ऑरचिट में 1, हिफाजत में 1 सैनिक सहित रुद्रप्रयाग जनपद के 51 वीर सैनिक भारतवर्ष की अखंडता को बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं।
वीर सिंह को मिला कीर्ति चक्र
वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध में धनपुर पट्टी के पीड़ा गांव के रायफल मैन वीर सिंह को अदम्य साहस के लिए सेना ने 24 सितंबर 1962 को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। वहीं, वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध में अपने पराक्रम का लोहा मनवाने वाले सारी गांव के हवलदार जय सिंह और बज्यूण गांव के सूबेदार सुजान सिंह को वीर चक्र से नवाजा गया। इसके अलावा 29 जवानों को सेना मेडिल और 6 जवानों को मेन-इन-डिश से नवाजा जा चुका है।