32 साल बाद अब नए सिरे से होगा गढ़वाल-कुमाऊं को जोड़ने वाले कंडी मार्ग का निर्माण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गढ़वाल और कुमाऊं को जोड़ने वाले कंडी मार्ग (कोटद्वार-रामनगर मार्ग) के निर्माण के लिए अब 32 साल बाद फिर से डीपीआर तैयार की जाएगी। रविवार को इसके लिए ईको टूरिज्म विकास निगम एवं नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। बता दें की कंडी मार्ग के बन जाने से गढ़वाल-कुमाऊं के बीच की दूरी 82 किमी कम हो जाएगी।
वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि यह मार्ग उत्तराखंड के विकास की लाइफ लाइन है। इससे न सिर्फ गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के बीच की दूरी घटेगी बल्कि पर्यटन को बढ़ावा और हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा।
मंथन सभागार में मीडिया से वार्ता में वन मंत्री ने कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र को जोड़ने वाले कंडी मार्ग की कुल दूरी 90 किलोमीटर है। इसमें से लगभग 50 किलोमीटर मार्ग कार्बेट टाइगर रिजर्व से होकर जाता है।
उन्होंने कहा कि रामनगर-कालागढ़-कोटद्वार मार्ग के निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग दुगड्डा ने 1976 में डीपीआर बनाई थी। इसमें कोटद्वार से गूलरस्रोत 19.37 किलोमीटर एवं लालढांग गांव से रामनगर तक 20 किलोमीटर तक का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया, लेकिन वन संरक्षण अधिनियम 1980 के लागू होने के बाद इस मार्ग के शेष हिस्से का निर्माण रुक गया।
पर्यटन को बढ़ावा और हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
मंत्री ने कहा कि कंडी मार्ग का निर्माण न होने से कोटद्वार से रामनगर जाने के लिए प्रदेश के लोगों को उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद-नगीना-धामपुर-अफजलगढ़-काशीपुर होकर जाना पड़ता है।
इस मार्ग की दूरी 172 किमी है। उन्होंने कहा कि कंडी मार्ग का ग्रीन मार्ग के रूप में निर्माण किया जाएगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान के तकनीकी निर्देशन पर निर्माण एजेंसी एनबीसीसी मार्ग की संभावित रिपोर्ट तैयार करेगी। मार्ग निर्माण को लेकर राज्य वन्य जीव बोर्ड, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण अधिकरण एवं राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड से अनुमोदन प्राप्त करेगी।
अपर मुख्य सचिव डा. रणवीर सिंह ने कहा कि मार्ग का निर्माण इस तरह से किया जाएगा, जिससे वन्य जीवन प्रभावित न हो। एनबीसीसी के कार्यकारी निदेशक योगेश शर्मा ने कहा कि आठ महीने के भीतर डीपीआर तैयार हो जाएगी। वहीं वन्य जीव बोर्ड से अनुमति के बाद अगले दो साल के भीतर मार्ग का निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
पर्यटन को बढ़ावा और हजारों लोगों को मिलेगा रोजगार
कृषि मंत्री ने कहा कि लगभग दो से तीन हजार करोड़ की लागत से इस मार्ग का निर्माण होगा। निर्माण एजेंसी एनबीसीसी को डीपीआर के लिए राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। इस मार्ग के निर्माण से हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। वहीं, वन्य जीवों को भी संरक्षित किया जाएगा।