टिहरी झील पर पूजा के शोध ने कैलाश सत्यार्थी को चौंकाया
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मुंबई में चल रहे भारतीय विज्ञान कांग्रेस में उत्तराखंड की पूजा सुर्खियों में हैं। टिहरी की पूजा द्वारा टिहरी झील पर किया गया शोध वैज्ञानिकों को बेहद पसंद आया है।
पूजा नेगी ने टिहरी झील में इकट्ठा हो रहे रेडियोधर्मी पदार्थ और उससे आस-पास पड़ रहे दुष्प्रभाव को अपने लघु शोध परियोजना के जरिए प्रस्तुत किया है। इतना ही नहीं इस परियोजना में झील में रेडियोधर्मी पदार्थों का असर कम करने के साथ लोगों को इससे बचाने के तरीके भी बताए हैं।
सोमवार को नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी पूजा के लघु शोध की तारीफ की। राजकीय इंटर कॉलेज, धारकोट, टिहरी की दसवीं की छात्रा पूजा नेगी ने परियोजना रेडियोधर्मी विशेषज्ञ डॉ. मनबीर नेगी के मार्गदर्शन में तैयार की है।
इस पर उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकोस्ट) भी मुहर लगा चुका है। मुंबई में तीन जनवरी से शुरू हुए भारतीय विज्ञान कांग्रेस में पूजा का लघु शोध सुर्खियों में है।
यह है पूजा का प्रोजेक्ट
डॉ. मनबीर नेगी ने बताया कि कई देशों के वैज्ञानिकों ने पूजा की परियोजना को सराहा है। सोमवार को नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने पूजा की तारीफ करते हुए इसके जरिए टिहरी झील का नुकसान जाना। उन्होंने टिहरी विस्थापन और पुनर्वास की भी जानकारी ली।
विज्ञान कांग्रेस का समापन सात जनवरी को होगा। पूजा मुंबई में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कर रही है। उनका चयन गत वर्ष पुणे में हुई राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस से मुंबई के लिए हुआ था।
पूजा ने टिहरी झील के ऊपरी तल पर जमा हो रहे रेडियोएक्टिव पदार्थों पर शोध किया है। इसके जरिए बताया कि किस तरह एक बड़ी विद्युत परियोजना आसपास के जनजीवन के लिए बेहद खतरनाक बन चुकी है।
साथ ही संदेश देने का प्रयास किया है कि भविष्य में छोटी-छोटी परियोजनाएं भी बनाई जाएंगी तो उनसे भी ऐसे नुकसान हो सकते हैं। पूजा ने लघु शोध के जरिए पर्यावरणीय नुकसानों के प्रति आगाह भी किया है।