नेपाल में आए भूकंप से कैलास मानसरोवर यात्रा को खतरा!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कैलास मानसरोवर यात्रा के दौरान सूबे के मौसम विभाग ने सभी यात्रियों को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
विभाग के मुताबिक इस साल नेपाल और उत्तराखंड में आए भूकंप के बाद तेज बारिश होने पर भूस्खलन का खतरा है। मौसम विभाग ने नौ जून को विदेश मंत्रालय को एक पत्र भेजा है। इसमें निदेशक आनंद शर्मा ने आगाह किया है कि चूंकि इस साल नेपाल और उत्तराखंड के कई इलाकों में कई बार भूकंप आया है।
लिहाजा पहाड़ों में दरारें हो सकती हैं। ऐसे में मानसून आने और बारिश बढ़ने पर इन पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता है। आनंद शर्मा के मुताबिक फिलहाल भूस्खलन की कोई चेतावनी नहीं है सिर्फ बचाव की सलाह जारी की गई है।
कैलास यात्रा : आज होगा सबसे लंबा सफर
कैलास मानसरोवर की यात्रा पर जा रहे पहले दल के सदस्यों को मंगलवार को सबसे लंबा पैदल सफर तय करना होगा। बूंदी पड़ाव तक जाने में यात्रियों को 24 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी। 1998 के बाद मालपा पड़ाव बंद हो जाने से यात्रियों को अब गाला से सीधे बूंदी जाना पड़ता है। बूंदी तक कई स्थानों पर पैदल रास्ता खराब होने से एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई है।
थाना प्रभारी विजेंद्र साह ने बताया कि एसडीआरएफ यात्रियों को मालपा, बूंदी, लखनपुर में खतरनाक रास्तों से पार कराने में मदद करेगी। इस समय जिला पुलिस और चिकित्सा विभाग की टीम यात्रियों के साथ चल रही है। यह टीम यात्रियों को गुंजी तक पहुंचाएगी। गुंजी से यात्रियों की सुरक्षा का जिम्मा आईटीबीपी के जवानों पर होगा। गुंजी से लिपुलेख तक आईटीबीपी की ही मेडिकल टीम यात्रियों के साथ रहेगी।
बुधवार को यात्री गुंजी पड़ाव पहुंचेंगे। अगले दिन उनका स्वास्थ्य परीक्षण होगा। जो यात्री गुंजी में होने वाले स्वास्थ्य परीक्षण में अनफिट होंगे, उनको वापस कर दिया जाएगा। गुंजी में मुख्य रूप से दिल की जांच होती है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में यात्रियों को आक्सीजन की कमी से दिक्कत का सामना करना पड़ता है।