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जोशीमठ : जमीन में 50 मीटर तक गहरी दरारें मिलीं, धंस सकता है 30 फीसदी इलाका

Thu, 26 Jan 2023 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून/रुड़की
अमर उजाला नेटवर्क, देहरादून/रुड़की Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 26 Jan 2023 06:14 AM IST
सार

लगातार बहाव के कारण पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी बह गई है। अब तक करीब 460 जगहों पर जमीन के अंदर 40 से 50 मीटर तक गहरी दरारें पाई गईं हैं।

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Joshimath: Cracks up to 50 meters deep were found in the ground, 30 percent of the area may sink
जोशीमठ में खेतों में बढ़ी दरारें - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भू-धंसाव के संकट का सामना कर रहा जोशीमठ का एक बड़ा हिस्सा भीतर से खोखला हो चुका है। लगातार बहाव के कारण पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी बह गई है। अब तक करीब 460 जगहों पर जमीन के अंदर 40 से 50 मीटर तक गहरी दरारें पाई गईं हैं। ऐसे में भू-धंसाव से प्रभावित 30 प्रतिशत क्षेत्र कभी भी भरभरा कर नीचे धंस सकता है। इसलिए इस पूरे क्षेत्र में बसे करीब 4000 प्रभावितों को ''तत्काल'' विस्थापित करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। दरारों वाले भवनों को जल्द से जल्द ध्वस्त करना होगा।

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यह खुलासा जोशीमठ की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसियों की प्राथमिक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, एनडीएमए बुधवार को ही केंद्रीय गृह मंत्रालय में इसका प्रस्तुतिकरण भी दे चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जांच की अंतिम सर्वे रिपोर्ट आने के बाद जोशीमठ की तस्वीर और भयावह हो सकती है। क्योंकि देर सबेर पूरा जोशीमठ इसकी जद में आ जाएगा।
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सबसे चौंकाने वाली रिपोर्ट पानी के रिसाव पर राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की है। इसकी जांच में पाया कि 460 से अधिक स्थानों पर 40 से 50 मीटर तक दरारें हैं। जोशीमठ का ढलानदार पहाड़ पहले से ही मलबे के ढेर पर बना है। जो मिट्टी बोल्डरों को बांधे हुई थी, वह पानी के साथ बह चुकी है। बोल्डरों के नीचे का हिस्सा खोखला हो चुका है। इसलिए भार को सहने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो गई है।
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विस्थापन के लिए भवनों का डिजाइन भी तैयार
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) ने विस्थापन के लिए तीन स्थानों की साइट देख ली है। यहां विस्थापितों के लिए बनाए जाने वाले भवनों का डिजाइन भी तय कर लिया गया है।


अब तक के हाल...

  • 2500 भवनों में 4000 प्रभावित
  • सूत्रों के मुताबिक सीबीआरआई के सर्वे में पाया गया कि भू-धंसाव क्षेत्र में 4000 भवन नहीं है बल्कि 2500 मकान है, जिनमें 4000 प्रभावित हैं
  • रेट्रोफिटिंग की भी सिफारिश
  • दरारों वाले 30 प्रतिशत भवन ध्वस्त करने की सिफारिश की गई है। कुछ संस्थानों ने बाकी भवनों की रेट्रोफिटिंग की संभावना तलाशने का भी सुझाव दिया है

पानी के रिसाव पर हालात अब भी स्पष्ट नहीं
वैज्ञानिक संस्थानों के सूत्रों के मुताबिक जोशीमठ में जमीन के नीचे रिस रहे पानी को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। वैज्ञानिक अब तक इसे प्राकृतिक स्रोत्र मान रहे हैं। जिसने भारी निर्माण कार्यों के कारण अपना रास्ता बदल लिया। इस पर अभी विस्तृत रिपोर्ट आना बाकी है।

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