फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   jagadguru ramanandacharya hansdevacharya death life story

ऐसा था स्वामी हंसदेवाचार्य का जगद्गुरु बनने तक का सफर, बन गए थे आध्यात्म के प्रणेता...

Sat, 23 Feb 2019 08:32 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sat, 23 Feb 2019 08:32 AM IST
विज्ञापन
jagadguru ramanandacharya hansdevacharya death life story
जगतगुरु हंसदेवाचार्य जी

वैष्णव संप्रदाय के सर्वोच्च पद पर आसीन जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज अध्यात्म जगत के प्रणेता थे। उन्होंने जीवनभर सनातन धर्म के उच्च मानदंडों का अनुसरण किया।

विज्ञापन


वह हरिद्वार के संत जगत के अलावा सामान्य लोगों के बीच भी बेहद लोकप्रिय थे। अकेले हरिद्वार में ही उनके शिष्यों की संख्या हजारों में है। जानकारी के अनुसार, स्वामी हंसदेवाचार्य की पार्थिव देह शुक्रवार रात हरिद्वार पहुंच जाएगी।
विज्ञापन


भीमगोड़ा के जगन्नाथ धाम में उनकी देह लोगों के दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए रखी जाएगी। बड़ी संख्या में देशभर से उनके अनुयायी हरिद्वार पहुंचने लगे हैं। बताया जाता है कि कई बड़े संत और नेता भी उनकी अंत्येष्टि में शामिल होंगे। स्वामी हंसदेवाचार्य को खड़खड़ी श्मशान घाट पर शाम चार बजे मुखाग्नि दी जाएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

वर्ष 2010 में आसीन हुए थे जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर 

स्वामी हंसदेवाचार्य का जन्म हरियाणा में झज्झर जिले के दुजाना गांव में हुआ था। हंसदेवाचार्य जब तक रामानंदाचार्य पद पर आसीन नहीं हुए थे, जब तक हरिद्वार में उन्हें स्वामी हंसदास के नाम से जाना जाता था। बालपन में ही वे हरिद्वार चले आए और चेतन ज्योति विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की। हरिद्वार में नगर पालिका अध्यक्ष रहे सतपाल ब्रह्मचारी उनके बाल सहपाठी हैं। 

स्वामी हंसदास ने अनेक गुरु धारण किए। वे ऋषिकेश के स्वामी जगन्नाथ के शिष्य बने। बाद में जगन्नाथ धाम के नाम से उन्होंने कई आश्रम बनाए। स्वामी हरिदास से उन्होंने मंत्र दीक्षा ली थी। स्वामी पूर्णनाथ और कृष्णानंद भी उनके गुरु थे। स्वामी हंसदास पहले उदासियों के बड़े अखाड़े से जुड़े और उस अखाड़े के महामंडलेश्वर बने। बाद में वैष्णव संप्रदाय अपनाकर स्वामी हंसदास बैरागी अणियों से जुड़ गए।

उनका नाम हंसदेवाचार्य हो गया। वैष्णव संप्रदाय ने वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में उन्हें अपना सर्वोच्च पद जगद्गुरु रामानंदाचार्य प्रदान किया। स्वामी हंसदेवाचार्य की संघ परिवार में गहरी पैठ थी। देश की जानी-मानी राजनीतिक हस्तियां उनसे आशीर्वाद लेने हरिद्वार आती थीं। राम जन्मभूमि के आंदोलन में स्वामी हंसदेवाचार्य का योगदान भुलाया नहीं जा सकता। हाल ही में उन्होंने प्रयागराज में हुई विहिप की धर्म संसद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

हंसदेवाचार्य के निधन से संत समाज में शोक की लहर

जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज के निधन से संत समाज में शोक की लहर दौड़ गई। निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में संत उनके आश्रम जगन्नाथ धाम पहुंचे और उनको श्रद्धांजलि दी। संतों ने हंसदेवाचार्य के निधन को धर्म जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया। 

जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी महाराज ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज हिंदुओं के हृदय सम्राट और संत समाज के प्रेरणास्रोत थे। बाबा हठयोगी ने कहा कि स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज जीवन पर्यंत राष्ट्र और समाज की सेवा करते रहे।

राम मंदिर निर्माण के लिए वह हमेशा सक्रिय रहे। निर्धन निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज आध्यात्मिक जगत के शिखर महापुरुष थे। उन्होंने अपने तप और विद्वता के माध्यम से समाज का मार्ग दर्शन किया। 

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के कोठारी महंत प्रेमदास महाराज, श्री पंचायती अखाड़ा निर्मला के मुखिया महंत कमलजीत, कोठारी महंत जसविंद्र सिंह, सचिव महंत बलवंत सिंह ने भी उनके निधन पर शोक जताया।
 

संत समाज को एकजुट करने में रही महत्वपूर्ण भूमिका 

श्री दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि राम मंदिर के लिए उनका संघर्ष इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा महामंडलेश्वर स्वामी कपिल मुनि, महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती महाराज, सतपाल ब्रह्मचारी, महामंडलेश्वर स्वामी श्याम सुंदरदास शास्त्री, महंत रामकिशनदास महाराज, महंत विनोद गिरी महाराज आदि ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। 

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज, आनंद पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर, स्वामी बालकानंद गिरि महाराज ने कहा कि प्रयागराज कुंभ मेले में स्वामी हंसदेवाचार्य महाराज ने सभी संत महापुरुषों को एक मंच पर लाने का जो कार्य किया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

संत समाज को एकजुट करने में उनकी अहम भूमिका रहती थी। उन्होंने सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति को विश्व पटल पर एक नए रूप में प्रस्तुत किया। अपनी तप और विद्वता के माध्यम से उन्होंने समाज से कुरीतियों को मिटाकर सदैव एक नई दिशा प्रदान की। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed