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बस से चलती है कंडक्टर की आईपीएस बेटी

Sun, 12 Oct 2014 05:14 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 12 Oct 2014 05:14 PM IST
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IPS shalini agnihotri.

हिमाचल प्रदेश के कंडक्टर की आईपीएस बेटी को बस से सफर करना अच्छा लगता है। वह इसे सुरक्षित भी मानती हैं।

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कहती हैं कि जिस तरह मैं बस में बैठकर यात्रियों के साथ सुरक्षित महसूस करती हूं, चाहती हूं कि उसी तरह हर आम आदमी महसूस करे। इसलिए मैं कानून-व्यवस्था का राज कायम करना चाहती हूं।

हिमाचल प्रदेश के बस कंडक्टर रमेश कुमार अग्निहोत्री की आईपीएस बेटी शालिनी अग्निहोत्री एक सम्मान समारोह में शिरकत करने बस से शनिवार को देहरादून पहुंचीं तो अमर उजाला से बातचीत में अपने एहसास साझा किए।
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शालिनी ने बताया कि मैं जिस तरह बस या आटो में बैठकर सेफ फील करती हूं, उसी तरह अपने कार्यक्षेत्र में भी चाहती हूं कि लोग सुरक्षित महसूस करें। बेहद सरल स्वभाव की शालिनी ने मेहनत के दम पर वर्ष 2012 में सिविल सेवा परीक्षा पास की।

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सभी जगहों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से जाना पसंद

IPS shalini agnihotri.

एक ओर जहां आईपीएस के लिए गाड़ियां, गनर और ड्राइवर स्टेटस सिबंल बन चुके हैं, वहीं शालिनी के लिए यह सब प्रोफेशन का केवल पार्ट भर है।

अपराधियों को पकड़ने और कानून व्यवस्था बनाने को छोड़कर वह बाकी सभी जगहों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ही जाना पसंद करती हैं। आधुनिकता के दौड़ भाग वाले दौर में भी शालिनी पुराने मॉडल का फोन इस्तेमाल करती हैं।

उनकी बातचीत से कहीं भी गुरूर नहीं दिखता। चुनौतियों के बारे में कहती हैं कि ज्यादातर स्टाफ पुरुष होने की वजह से थोड़ा बात करने में झिझकते हैं लेकिन बाद में सब सामान्य हो जाता है।

शालिनी को दून में रविवार को आयोजित होने जा रहे यंग उत्तराखंड अवार्ड में उनकी सादगी और कार्यों के लिए ‘वाईआई अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।

महिलाएं करती हैं दुरुपयोग

IPS shalini agnihotri.

शालिनी ने अपने छोटे से कार्यकाल में इतना सीख लिया है कि जागरूकता बढ़ने की वजह से कई महिलाएं अपने लिए बने कानूनों का दुरुपयोग करती हैं। उनकी कोशिश होती है कि किसी महिला की इस हरकत की वजह से किसी की जिंदगी बर्बाद न हो जाए।

मन में हो विश्वास तो होंगे कामयाब
शालिनी का कहना है कि भले ही समाज में लड़कियों को बेगानी निगाहों से देखा जाता है लेकिन अगर बेटियां मन में ठान लें तो कोई भी काम मुश्किल नहीं है।

अपनी इसी सोच और मेहनत के दम पर उन्होंने यह मुकाम पाया है। शालिनी देश की पहली महिला आईपीएस किरण बेदी को इस मामले में आदर्श मानती हैं।

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