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अब टीचर की खोज रोकेगी ट्रेन एक्सीडेंट
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 26 Sep 2014 08:21 AM IST
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मानव रहित रेल फाटकों पर हादसे रोकने के लिए कोटद्वार के एक शिक्षक और इलेक्ट्रीशियन ने नया उपकरण तैयार किया है।
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हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी लगाम
इसके जरिए न सिर्फ हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी, बल्कि रेलवे का व्यय भी इस पर बेहद कम होगा। गुरुवार को दोनों ने दून विवि में सेमिनार के दौरान इसका प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने दावा किया कि इस बाबत रेल मंत्रालय ने भी संज्ञान लिया है। सहायक अध्यापक महेंद्र सिंह राणा और इलेक्ट्रीशियन राजेश्वर सेमवाल ने वर्षों की मेहनत के बाद यह उपकरण तैयार किया।
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गुरुवार को दून विवि में मुक्त विवि की विज्ञान कार्यशाला में राणा ने बताया कि उनका रेल दुर्घटनारोधी यंत्र सौर ऊर्जा से चलता है।
उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ऐसा कोई उपकरण नहीं बन सका है। पहले वह कई राज्यस्तरीय सेमिनारों में प्रेजेंटेशन दे चुके हैं।
उन्होंने बताया कि रेल मंत्रालय को जानकारी देने के बाद उन्होंने रुचि दिखाई और फोन भी आया। लेकिन तब तक सरकार बदल गई। अब वह दोबारा संपर्क कर रहे हैं।
उपकरण इस तरह करेगा काम
राणा और सेमवाल के मुताबिक जहां मानव रहित रेलवे फाटक होगा, उससे पांच किमी पहले ट्रैक पर ट्रेन की ऊंचाई से आधा मीटर ऊपर एक चुंबकीय सर्किट लगाया जाएगा।
जैसे ही ट्रेन इस सर्कि ट के नीचे से गुजरेगी। गाड़ी लोहे की तरफ चुंबकीय सर्किट खिंच जाएगा। सर्किट कुछ सेमी नीचे आते ही बटन दब जाएगा और मानव रहित फाटक पर सायरन और लाल सिग्नल ऑन हो जाएगा।
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यह उपकरण सौर ऊर्जा से संचालित होगा। रात को 12 वोल्ट की चार्ज बैटरी यह काम करेगी। चुंबकीय सर्किट तभी अपनी जगह से हिलेगा, तब करीब 100 क्विंटल की कोई चीज नीचे से गुजरे। ट्रैक पर इतनी भारी लोहा सिर्फ ट्रेन ही हो सकती है।