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हरिद्वार में अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव का शुभारंभ
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 03 Oct 2014 09:16 AM IST
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देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में बृहस्पतिवार से पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव शुरू हुआ। उद्घाटन अवसर पर अमेरिका के अध्यात्मवेत्ता और समाज सुधारक पैट्रिक ने कहा कि भविष्य में भारत की संस्कृति पूरे विश्व की संस्कृति बनेगी। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंडया ने योग, अध्यात्म और संस्कृति को राष्ट्र की उन्नति के लिए आवश्यक बताया।
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देश विदेश के योगाचार्य पहुंचे
विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में देश-विदेश के योगाचार्य और अध्यात्म से जुड़ी 200 से अधिक हस्तियों ने महोत्सव में शिरकत की। इस अवसर पर अमेरिका के आध्यात्मिक नेता, समाज सुधारक और महात्मा गांधी पुरस्कार से सम्मानित पैट्रिक मैक्यूलम ने कहा कि भारतीय योग, संस्कृति और अध्यात्म यह तीनों वैयक्तिक धर्म ही नहीं, बल्कि समूह धर्म और वैश्विक धर्म स्थापित करने के आधार स्तंभ हैं। यदि कभी वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक उत्थान होगा तो उसके मूल में निश्चित रूप से भारतीय संस्कृति रहेगी।
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बताया योग का महत्व
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि परिवार और समाज उत्थान की धुरी योग, संस्कृति और अध्यात्म है, लेकिन इस बात का अफसोस है कि आज इनकी महत्ता को भुलाया जा रहा है।
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पद्मश्री डॉ. कार्तिकेयन ने कहा कि धर्म मानव को परस्पर जोड़ता है। प्रति कुलपति डॉ. प्रणव पंड्या ने कहा कि मानव जीवन को ऊंचा उठाने में योग, संस्कृति और अध्यात्म अनिवार्य है। कुलपति शरद पारथी ने विश्वविद्यालय के विभिन्न क्रियाकलापों की जानकारी दी।