वैली आफ वर्ड्स: फिर से ताजा होंगी बांग्लादेश और चीन के साथ भारत के युद्ध की यादें
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इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल ‘वैली आफ वर्ड्स’ में बांग्लादेश और चीन के साथ भारत के युद्ध की धुंधली पड़ी स्मृतियों से समय की गर्द हटेगी। इसके साथ ही विशेष सत्रों में सैन्य अधिकारियों की युद्ध की यादों से लोग रू-ब-रू होंगे।
साथ ही विशेषज्ञ आतंकवाद तथा पड़ोसी देशों के साथ व्यापारिक संबंध आदि मुद्दों की समीक्षा भी करेंगे। शुक्रवार से शुरू हो रहे तीन दिवसीय इंटरनेशनल फेस्टिवल में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है।
इंटरनेशनल फेस्टिवल ‘वैली आफ वर्ड्स’ में पुस्तकों के विमोचन, समीक्षा के अलावा विभिन्न घटनाओं की सैन्य स्थिति पर भी चर्चा होगी। इसके लिए विशेष सत्र ‘ट्रेडिंग पार्टनर्स एंड वॉरिंग नेबर्स’ रखा गया है।
इस सत्र का संयोजन कर रहे लेखक अरविंदर सिंह ने बताया कि इस सत्र को मेजर जनरल पीजेएस संधु संबोधित करेंगे। इसमें फोकस चीन पर रहेगा। इसके साथ ही बांग्लादेश, पाकिस्तान आदि की भी चर्चा की जाएगी।
इंटरनेशनल फेस्टिवल की तैयारियां पूरी
सीमा पर तनाव के साथ चल रहीं व्यापारिक गतिविधियों पर विशेषज्ञ विचार रखेंगे। अरविंद सिंह ने बताया कि सेना और रणनीति विषय पर आधारित सत्र में वर्ष 1971 में बांग्लादेश युद्ध पर चर्चा की जाएगी।
इसमें मेजर जनरल एजेएस संधू विचार व्यक्त करेंगे। ट्रेडिंग पार्टनर्स पर मोहन गुरुस्वामी अपने विचार रखेंगे। विक्टोरिया क्रॉस: अ लव स्टोरी पुस्तक पर अशली वर्मा, कर्नल डीपीके पिलई चर्चा करेंगे।
इस सत्र की अध्यक्षता मेजर जनरल कार्डोजो करेंगे। सत्रों में आतंकवाद के विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञ विचार व्यक्त करेंगे। इस विषय के वक्ताओं में पूर्व गृह सचिव मधुकर गुप्ता भी हैं। विशेष सत्र ‘व्हाट अ लाइफ: अ केलिडियोस्कोप ऑन राजेंद्र पुरीज कार्टून्स’ में कार्टूनिस्ट राजेंद्र पुरी के 25 साल के संघर्ष की कहानी पर चर्चा की जाएगी।
इंटरनेशनल फेस्टिवल की तैयारियां पूरी
मधुबन होटल में होने वाले इंटरनेशनल लिटरेचर एंड आर्ट्स फेस्टिवल ‘वैली आफ वर्ड्स’ की तैयारियां पूरी हो गई हैं। फेस्टिवल के ऑनरेरी एडवाइजर संजीव चोपड़ा ने बताया कि कार्यक्रम सबके लिए है। फेस्टिवल में कोई प्रवेश शुल्क नहीं है। होटल परिसर के अंदर ही चार कार्यक्रम स्थल बनाए गए हैं। इनका नाम ओएनजीसी लॉन, सेरी सेंटर, टाइटन हॉल, ब्लू स्टार हॉल रखा गया है।