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बाढ़ से बचाएगा अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट मिशन
अंकित कुमार गर्ग/ अमर उजाला, रुड़की
Updated Thu, 24 Sep 2015 03:34 PM IST
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नासा और जापान की ओर से हाल में बाढ़ और बारिश की संभावनाओं के मद्देनजर अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट मिशन जीपीएम (ग्लोबल प्रेसीपिटेशन मेजरमेंट) लांच किया गया है।
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यदि इससे प्राप्त सैटेलाइट डाटा को भारत के एलगोरिदम (कलन गणित) के हिसाब से डिजाइन कर लिया जाए तो इसकी मदद से उत्तराखंड, हिमाचल, कश्मीर सहित समूचे देश में बादल फटने, भारी बारिश और बाढ़ की तबाही से एक दिन पहले सटीक भविष्यवाणी संभव है। इस बाबत दिल्ली में बुलाई गई वैज्ञानिकों की बैठक में आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव सौंपा है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन पर 14 सितंबर को नेशनल ग्रीन पार्क दिल्ली में बाढ़ के मद्देनजर अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार करने पर बैठक हुई। इसमें आईआईटी रुड़की के जल संसाधन विकास एवं प्रबंधन विभाग के वैज्ञानिक प्रो. नयन शर्मा सहित इसरो, मौसम विभाग, केंद्रीय जल प्रबंधन विभाग आदि के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
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प्रो. शर्मा ने बताया कि नासा और जापान की ओर से फरवरी, 2014 में लांच जीपीएम मिशन के अंतर्गत प्रत्येक आधा घंटे में प्राप्त सैटेलाइट डाटा का विश्लेषण संभव है।
उन्होंने सरकार को सौंपे प्रोजेक्ट में बताया कि जीपीएम के द्वारा देश में पूर्व एवं सटीक भविष्यवाणी के लिए संबंधित डाटा के एलगोरिदम को भारत के हिसाब से डिजाइन करना होगा। इसके बाद संबंधित क्षेत्रों में भविष्यवाणी के लिए प्रत्येक चार किलोमीटर पर प्वाइंट तय कर हर आधा घंटे की संभावनाओं का विश्लेषण किया जा सकेगा।
बारिश की तीव्रता के आकलन के लिए डाटा बेस डिजिटल मॉडल यह बताएगा कि कहां, कब और कितनी बारिश होगी। उन्होंने बताया कि इस मॉडल के जरिए एक दिन पहले सटीक भविष्यवाणी हो सकती है। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को गंभीरता से लिया है और मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू किया जा सकता है।