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उत्तराखंड: अब नहीं मिल सकेगी अंतरिम जमानत, हाईकोर्ट ने आदेश को किया निरस्त
Sat, 04 May 2019 09:45 AM IST
अलका त्यागी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Published by: अलका त्यागी
Updated Sat, 04 May 2019 09:45 AM IST
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हाईकोर्ट ने प्रदेश में अंतरिम जमानत की व्यवस्था खत्म कर दी है। अदालत ने इससे पहले भारतीय दंड संहिता की धारा 438 को प्रभावी बनाकर अंतरिम जमानत देने की व्यवस्था कर दी थी। इस कारण निचली अदालतों को अंतरिम जमानत देने का अधिकार मिल गया था।
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बता दें कि देश के तमाम राज्यों ने दंड संहिता की धारा 438 को प्रभावी बनाया था, मगर उत्तराखंड गत वर्ष तक इसमें शामिल नहीं था। पिछले साल तत्कालीन कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ के समक्ष विष्णु सहाय ने स्पेशल अपील दायर की थी। स्पेशल अपील में दंड प्रक्रिया संहिता उत्तर प्रदेश संशोधन अधिनियम 1976 को चुनौती देते दी गई थी, जिसमें उत्तर प्रदेश ने धारा 438 को प्रभावी नहीं माना था।
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इस धारा के तहत अंतरिम जमानत का प्रावधान है। याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार ने धारा 9 यूपी एमेंडमेंट एक्ट 1976 के प्रावधान को न तो उत्तराखंड में अंगीकृत किया और न ही निरस्त किया। कोर्ट ने तब अंतरिम जमानत के प्रावधान उत्तराखंड में प्रभावी कर दिए थे।
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गत दिनों सरकार ने इस संबंध में हाईकोर्ट में पुन: जानकारी दी थी कि राज्य पुनर्गठन एक्ट के तहत नियम अंगीकृत किए गए थे लेकिन इसे समझने में अंतर आ गया था। मामले की समीक्षा के बाद शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और जस्टिस मनोज तिवारी की खंडपीठ ने अंतरिम जमानत के नियम को रद्द कर दिया।