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Dehradun News: बीमा कंपनी को 1.48 को चिकित्सा खर्च देने का आदेश
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Iन्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी पर लगा 25 हजार रुपये का जुर्माना
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Iजिला उपभोक्ता आयोग ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक बीमाधारक को चिकित्सा खर्च के 1.48 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही बीमा कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी ठहराते हुए 20 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है।
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Iआयोग ने यह आदेश नौ सितंबर को जारी किया। शिकायतकर्ता पवन कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी कमलेश कुमारी गुप्ता के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस से एक मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 11 अगस्त 2020 से 10 अगस्त 2021 तक थी। पॉलिसी के तहत बीमा कवरेज साढ़े चार लाख रुपये की थी।
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Iपॉलिसी की वैधता अवधि में कमलेश को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनके इलाज पर कुल 3.62 लाख से ज्यादा खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ 2.13 लाख का ही भुगतान किया। ऐसे में बाकी रकम के भुगतान के लिए उपभोक्ता को आयोग में गुहार लगानी पड़ी। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र खरे और सदस्य अल्का नेगी ने पाया कि कंपनी ने बिना किसी आधार के चिकित्सा खर्चों में कटौती की। इसे सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आदेश दिया कि न्यू इंडिया इंश्योरेंस को 45 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।I
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Iजिला उपभोक्ता आयोग ने न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को एक बीमाधारक को चिकित्सा खर्च के 1.48 लाख रुपये भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही बीमा कंपनी को सेवा में कोताही बरतने का दोषी ठहराते हुए 20 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का भी निर्देश दिया है।
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Iआयोग ने यह आदेश नौ सितंबर को जारी किया। शिकायतकर्ता पवन कुमार गुप्ता ने अपनी पत्नी कमलेश कुमारी गुप्ता के लिए न्यू इंडिया इंश्योरेंस से एक मेडिक्लेम पॉलिसी ली थी, जिसकी अवधि 11 अगस्त 2020 से 10 अगस्त 2021 तक थी। पॉलिसी के तहत बीमा कवरेज साढ़े चार लाख रुपये की थी।
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Iपॉलिसी की वैधता अवधि में कमलेश को दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। उनके इलाज पर कुल 3.62 लाख से ज्यादा खर्च आया, लेकिन बीमा कंपनी ने सिर्फ 2.13 लाख का ही भुगतान किया। ऐसे में बाकी रकम के भुगतान के लिए उपभोक्ता को आयोग में गुहार लगानी पड़ी। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेंद्र खरे और सदस्य अल्का नेगी ने पाया कि कंपनी ने बिना किसी आधार के चिकित्सा खर्चों में कटौती की। इसे सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आदेश दिया कि न्यू इंडिया इंश्योरेंस को 45 दिनों के भीतर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।I
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