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दरोगा भर्ती मामला: 2015 में भर्ती हुए करीब 10 फीसदी दरोगा नहीं जानते केस डायरी लिखना, पढ़ें ये खुलासे

Sat, 03 Sep 2022 06:14 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sat, 03 Sep 2022 06:14 PM IST
सार

दरोगा भर्ती में जांच में पता चला कि कम से कम 30 से 35 दरोगा नकल करके पास हुए हैं। यही कारण है कि पुलिस के मुखिया ने जांच की सिफारिश की और अब मुख्यमंत्री के आदेश पर विजिलेंस इसकी जांच करेगी। 2015 की यह सीधी भर्ती शुरुआत से ही विवादों में रही थी।

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Inspector Recruitment Case 10 percent recruited not know how to write case diary
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

वर्ष 2015 में भर्ती हुए कुछ दरोगा अपना मूल काम केस डायरी तक लिखना नहीं जानते हैं। इसके लिए वे दूसरों को पैसे देते हैं। इनकी संख्या उस वर्ष भर्ती हुए कुल दरोगाओं की 10 फीसदी बताई जा रही है। विभाग में ऐसे दरोगाओं की इन दिनों खूब चर्चा है।

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वर्तमान में चल रही जांच के दौरान भी पता चला है कि इस भर्ती में कम से कम 30 से 35 दरोगा नकल करके पास हुए हैं। यही कारण है कि पुलिस के मुखिया ने जांच की सिफारिश की और अब मुख्यमंत्री के आदेश पर विजिलेंस इसकी जांच करेगी। 2015 की यह सीधी भर्ती शुरुआत से ही विवादों में रही थी।
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सबसे पहले विवाद आरक्षण को लेकर हुआ था। पहले रिजल्ट जारी किया गया। जब आरक्षण लागू हुआ तो पास हुए कई अभ्यर्थी सूची से गायब हो गए। इसके बाद समय-समय पर इसे लेकर विभाग में चर्चा चली। मगर, टाल दिया गया। अब आयोग की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा की जांच के दौरान इस बात के साक्ष्य मिल चुके हैं कि तकरीबन 30 से 35 दरोगा इस भर्ती में नकल कर पास हुए हैं।

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गोपनीय जांच में भी खुलासा
यह संख्या कुल 349 दरोगाओं का लगभग 10 फीसदी है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ये दरोगा केस डायरी तक लिखना नहीं जानते हैं। अक्सर व्यस्तता का दावा कर अपने साथियों और जूनियरों को पैसे देते हैं ताकि समय पर केस डायरी लिखी जा सके। विभाग की गोपनीय जांच में भी इस बात का खुलासा हुआ है। अब विजिलेंस जांच के बाद ऐसे दरोगाओं पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि यदि नकल की बात पुष्ट हो जाती है तो उन्हें नौकरी से हाथ भी धोना पड़ सकता है। 

विभागीय अधिकारियों पर भी आ सकती है आंच
दरोगा भर्ती में कुछ विभागीय अधिकारियों पर भी आंच आ सकती है। क्योंकि, बिना उनकी मिलीभगत के भर्ती में गड़बड़ी करना असंभव है। ऐसे में कुछ सेवानिवृत्त और कुछ वर्तमान अधिकारी भी इसकी जद में आ सकते हैं। हालांकि, अभी जांच शुरू होने में वक्त है। ऐसे में परिणाम क्या होंगे यह भी वक्त ही बताएगा। 

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अब इस मामले की जांच विजिलेंस करेगी, लेकिन इससे पहले प्राथमिक पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसी के चलते मैंने विजिलेंस जांच की सिफारिश की थी। जांच के बाद यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। -अशोक कुमार, डीजीपी

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