उत्तराखंड: प्राइवेट कंपनी के करोड़ों के पेमेंट पर बैठी जांच
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गांव-गांव जाकर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा के लिए चलाई 13 मोबाइल हेल्थ वैन (एमएचवी) की संचालक कंपनी को किए करोड़ों के भुगतान पर शासन ने जांच बैठा दी है। आशंका जताई रही है कि मासिक बिलों में व्यापक गड़बड़ी कर कंपनी को निर्धारित से अधिक भुगतान किया गया है। संयुक्त सचिव रैंक के अधिकारी के अधीन चार सदस्यीय जांच कमेटी ने महानिदेशालय से भुगतान संबंधी तमाम पत्रावलियां तलब कर ली हैं। संभावना है कि मामले में संचालक कंपनी से करोड़ों की रिकवरी के साथ कई विभागीय अधिकारी नप सकते हैं।
वर्ष 2009 में विश्व बैंक की परियोजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने 13 करोड़ की लागत से 13 एमएचवी खरीदी थी, इसमें अल्ट्रासाउंड, एक्सरे समेत कई तरह की स्वास्थ्य जांचों की सुविधा थी।
एमएचवी का संचालन पीपीपी मोड में किए जाने के लिए दो कंपनियों से करार किया गया। इन कंपनियों को प्रत्येक जनपद में कैंप लगाकर मरीजों का निशुल्क इलाज करने का जिम्मा मिला। कैंप के अनुरूप इन्हें स्वास्थ्य विभाग प्रति वर्ष करोड़ों का भुगतान कर रहा था।
शासन ने रोका कई माह का बकाया भुगतान
वर्ष 2012 में कंपनियों के प्रति वाहन निर्धारित विशेषज्ञ, एमबीबीएस और पैरामेडिकल स्टॉफ को तैनात नहीं करने के मामला शासन के सामने आया तो प्रमुख सचिव स्वास्थ्य रणबीर सिंह ने सचिव स्तर के अधिकारी से जांच कराई। जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद उनके कई माह के बकाया भुगतान को रोक दिया गया, जिसे अभी तक जारी नहीं किया है।
नए स्तर से एमओयू बना, जिसमें तय मानकों अनुरूप संचालन नहीं करने पर जुर्माने का प्रावधान किया गया। विभाग को ऐसी शिकायतें मिली हैं कि विभागीय अधिकारियों ने तय मानकों के अनुरूप संचालन नहीं किया जबकि भुगतान अधिक किया गया। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य ओमप्रकाश ने संयुक्त सचिव अतर सिंह के अधीन जांच कमेटी गठित कर दी है, जिसमें वित्त सलाहकार, वित्त नियंत्रक और एक अनुसचिव शामिल है।
एमएचवी के संचालन और भुगतान में अनियमितताओं को लेकर चार अधिकारियों की जांच कमेटी गठित की है। संचालन कर रही कंपनी को निर्धारित मानकों से अधिक भुगतान किए जाने का प्रकरण है।
-ओम प्रकाश, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य