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Dehradun News: गंभीर चोट के बाद भी खून से सने टाइट कपड़े पहनने को मजबूर घायल
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रोडवेज बस दुर्घटना के घायलों का दून अस्पताल में उपचार चल रहा है। हालांकि, उन्हें यहां काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। शरीर पर गंभीर चोट के बाद भी उन्होंने खून से सने टाइट कपड़े पहने हुए हैं। सामान्य तौर पर अस्पताल की ओर से घायलों को हल्का गाउन दिया जाता है लेकिन दून अस्पताल में ऐसी कोई सुविधा नहीं दी जा रही है।
इसके अलावा कई घायलों के बैग में फोन का चार्जर भी था। मोबाइल की बैटरी खत्म होने के चलते लोग अपने परिजनों से बात तक नहीं कर पा रहे हैं। मेरठ निवासी रूपा ने बताया कि वह पिछले 24 घंटे से वही सूट पहने हुए है। उन्हें बार-बार बच्चे को दूध पिलाना होता है, ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है। बच्चों के पास भी कपड़े नहीं हैं। वहीं, छह साल के बेटे नकुल की कमर पर गहरा घाव है। इसके बावजूद वह जींस पहनने को मजबूर है।
सुमन ने बताया कि उनका सारा सामान बस में चला गया। पैर में प्लास्टर चढ़ाया गया है इसके बाद भी वह सलवार पहने हुए हैं, क्योंकि उनके पास और कोई कपड़े नहीं हैं।
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कोट
मरीजों की हालत बेहतर हो रही है। सोमवार को करीब 10 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। करीब 11 घायल अभी बचे हैं। घायलों का सामान नहीं आ पाया है लेकिन कपड़ों की जरूरत होगी तो दे दिए जाएंगे।
डॉ. धनंजय डोभाल, डिप्टी एमएस, दून अस्पताल
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इसके अलावा कई घायलों के बैग में फोन का चार्जर भी था। मोबाइल की बैटरी खत्म होने के चलते लोग अपने परिजनों से बात तक नहीं कर पा रहे हैं। मेरठ निवासी रूपा ने बताया कि वह पिछले 24 घंटे से वही सूट पहने हुए है। उन्हें बार-बार बच्चे को दूध पिलाना होता है, ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है। बच्चों के पास भी कपड़े नहीं हैं। वहीं, छह साल के बेटे नकुल की कमर पर गहरा घाव है। इसके बावजूद वह जींस पहनने को मजबूर है।
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सुमन ने बताया कि उनका सारा सामान बस में चला गया। पैर में प्लास्टर चढ़ाया गया है इसके बाद भी वह सलवार पहने हुए हैं, क्योंकि उनके पास और कोई कपड़े नहीं हैं।
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मरीजों की हालत बेहतर हो रही है। सोमवार को करीब 10 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया गया है। करीब 11 घायल अभी बचे हैं। घायलों का सामान नहीं आ पाया है लेकिन कपड़ों की जरूरत होगी तो दे दिए जाएंगे।
डॉ. धनंजय डोभाल, डिप्टी एमएस, दून अस्पताल