Ima Pop 2020: सैन्य अफसर बनने जा रहे अपने बेटों के कंधों पर सितारे नहीं सजा पाएंगे माता-पिता
- इस बार परिजन नहीं हो पाएंगे पीओपी में शामिल
- कोरोना संक्रमण की वजह से आईएमए की ओर से कैडेट्स के परिजनों को नहीं भेजा गया बुलावा
- आईएमए से सटे प्रेमनगर निवासी रावत दंपती भी सैन्य अफसर बनने जा रहे बेटे की खुशी में नहीं पाएगा भागीदार
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आईएमए की पासिंग आउट परेड (पीओपी) के दौरान ड्रिल स्क्वायर पर सीना चौड़ा किए कदमताल करके अपने बेटे को देखने और उसके कंधों पर पीप्स (सितारे) सजाने की माता-पिता की इच्छा इस बार कोरोना की वजह से पूरी नहीं हो पाएगी। ऐसे ही आईएमए से सटे प्रेमनगर में रहने वाले परिजन भी अपने बेटे की इस खुशी में शामिल नहीं हो पाएंगे।
आईएमए से सटे प्रेमनगर के विंग सात में रहने वाले सेना के रिटायरर्ड नायब सूबेदार मोहन सिंह रावत व उनकी पत्नी मोहिनी रावत मूलरूप से चमोली जिले के नारायणबगड़ ब्लॉक के बिनायक गांव निवासी हैं। उनका इकलौता बेटा हीरा सिंह रावत (दीपू) भी इस बार आईएमए से पास आउट होकर बतौर लेफ्टिनेंट सेना का अंग बनने जा रहा है।
उसे आर्मी एविएशन कोर में कमीशन प्राप्त हो रहा है। केंद्रीय विद्यालय आईएमए से दसवीं व 12वीं पास करने के बाद हीरा ने आगरा स्थित दयालबाग इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक किया था। इसके बाद उसका प्लेसमेंट टाटा कंसल्टेंसी सर्विस में हुआ, लेकिन हीरा ने मल्टीनेशनल कंपनी की जॉब को ठुकरा कर अपने परिवार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सेना ज्वाइन करने को तरजीह दी।
उसने सीडीएस की परीक्षा पास कर अकादमी में प्रवेश प्राप्त किया। अकादमी से सालभर तक कड़ा सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब वह सेना में अफसर बनने जा रहा है। माता-पिता अपने लाडले को मिलने जा रही खुशी के इस दिन का इंतजार कर रहे थे, लेकिन कोरोना (कोविड-19) संक्रमण की वजह से उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है।
परिजनों की मायूसी इस बात को लेकर भी कि महज कुछ दूरी पर आयोजित हो रही पासिंग आउट परेड के यादगार पलों को वह देख नहीं पा रहे हैं। मोहन सिंह रावत कहते हैं कि उन्हें अपने बेटे की कामयाबी पर खुशी है लेकिन इस खुशी में शामिल न होने का मलाल भी।
बता दें कि कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार पीओपी में आईएमए की ओर से किसी भी कैडेट्स के परिजनों को बुलावा नहीं भेजा गया है, मोहन सिंह रावत जैसे कई माता-पिता को बेटे की खुशी में शामिल न होने का मलाल है।