{"_id":"57147bf44f1c1b054e10fbe8","slug":"indian-army-planning-suffers-due-to-uttarakhand-politics","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड की सियासी उठा-पटक में अटके सामरिक मसले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड की सियासी उठा-पटक में अटके सामरिक मसले
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 18 Apr 2016 12:10 PM IST
विज्ञापन
भारतीय सेना में वैकेंसी
- फोटो : DEMO Pics
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में चल रही सियासी उठक पटक का खामियाजा प्रदेश में सामरिक महत्व की सैन्य योजनाओं पड़ने लगा है। सीएम और सेना कमांडर के बीच होने वाली सिविल मिलिट्री लाइजनिंग कान्फ्रेंस (सीएमएलसी) गहराये सियासी संकट की भेंट चढ़ गई है।
विज्ञापन
प्रदेश में सैन्य योजनाओं के लिए आवश्यक भूमि से संबंधित अनुमति कान्फ्रेंस पर टिकी है, जिसके लिए सामरिक व अन्य महत्व के 36 एजेंड़ा प्वाइंट तैयार किये गए हैं। हालांकि एजेंड़े में चिन्हित प्रकरणों पर सेना और शासन के बीच एक दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन आम सहमति कान्फ्रेंस के बाद बनेगी। गौरतलब है कि सेना को सीमांत क्षेत्रों में लगभग 15 सौ एकड़ भूमि की आवश्यकता है।
विज्ञापन
राज्य गठन के 15 वर्ष में केवल दो बार सीएमएलसी हुई है, जिससे सेना के प्रदेश में भूमि से संबंधित कई मसले लटके हुए हैं। आखिरी बार वर्ष 2012 में हुई कान्फ्रेंस के जिन बिंदुओं पर आम राय बनी थी उनमें कई अभी अनिर्णय की स्थिति में है। इस मुद्दे को सेना लगातार शासन से उठा रही है। सेना लगभग 6 माह से सीएमएलसी को शासन से वार्ता कर रही है।
विज्ञापन
जनवरी में बैठक का प्रारूप तय हुआ, जिसके बाद अप्रैल में सीएम के साथ वार्ता होनी तय हुई। कान्फ्रेंस को लेकर स्टिरिंग कमेटी में सेना और शासन के अधिकारी एजेंड़ा प्वाइंट पर वार्ता भी कर चुके हैं। इस बीच मार्च में सरकार पर संकट गहराने से कान्फ्रेंस को लेकर चल रही कवायद भी थम गई है।
सामरिक महत्व की कई योजनाओं के अलावा राज्य की छावनियों में रहने वाली सिविल आबादी और पूर्व सैनिक कल्याण की योजनाओं जिनपर द्विपक्षीय वार्ता के बाद ही निर्णय होना है। अगर राष्ट्रपति शासन की स्थिति लंबी खींची तो सेना राज्यपाल की अध्यक्षता में कान्फ्रेंस के लिए भी प्रस्ताव बना रही है। प्रदेश में सैन्य परियोजनाओं का भविष्य बड़ी हद तक इस बैठक पर बनने वाली आम सहमति पर टिकी है।
यह मुद्दे हैं सेना के लिए अहम
सेना के तैयार एजेंड़ा प्वाइंट में लगभग 1500 एकड़ भूमि के मुद्दे है। चीन सीमा से समीप उर्गम घाटी में 600 एकड़ भूमि, माना में डेढ़ हेक्टेयर भूमि, कोसानी में 292.073 एकड़ भूमि, हल्द्वानी में साढ़े तीन सौ एकड़ भूमि जैसे प्रमुख प्रस्ताव हैं, जो लंबे समय से स्वीकृति नहीं मिलने से अटके हैं। सीमांत क्षेत्र में सेना की ढांचागत सुविधाओं के साथ तैनाती बढ़ाने के लिए यह सभी योजनाएं महत्वपूर्ण हैं।