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सीमा पर भारतीय जहाज उतारने की तैयारी में वायुसेना
ब्यूरो / अमर उजाला, गौचर/चिन्यालीसौड़
Updated Thu, 31 Aug 2017 03:57 PM IST
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निर्माणाधीन चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का निरीक्षण किया
- फोटो : amar ujala
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जी, हां वायु सेना सीमांत जनपदों पर जहाज उतारने की तैयारी में है। इस संबंध में गौचर हवाई पट्टी और निर्माणाधीन चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का निरीक्षण किया।
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वायु सेना अधिकारियों ने नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों के साथ बुधवार को गौचर हवाई पट्टी और निर्माणाधीन चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे का संयुक्त निरीक्षण किया।
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समझा जाता है कि वायु सेना अब सैन्य जरूरत के हिसाब से चिन्यालीसौड़ के साथ ही गौचर हवाई पट्टी को भी हवाई अड्डे के रूप में विकसित कर इनका इस्तेमाल कर सकती है। दोनों स्थानों में हवाई जहाज उतारने की आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए वायु सेना के अधिकारियों ने जरूरी सुझाव नागरिक उड्डयन विभाग के अधिकारियों को दिए हैं।
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उपलब्ध जमीन तक हवाई पट्टी को बढ़ाने का सुझाव
उड़ान में बाधा बन रही आसपास की पहाड़ियों पर भी चर्चा की गई।
गौचर हवाई पट्टी के संयुक्त निरीक्षण कर वायु सेना के अधिकारियों ने कई सुझाव दिए।
इनमें गौचर हवाई पट्टी और इसकी सुरक्षा दीवारों को सीधा कर रखरखाव करने, दीवारों की ऊंचाई कम करने, हवाई पट्टी से सटे कालिंका देवी मंदिर के प्रतीक्षालय के बेसमेंट और लिंटर को सुरक्षा दीवारों से हटाने के साथ ही दोनों छोर पर उपलब्ध जमीन तक हवाई पट्टी को बढ़ाने के सुझाव मुख्य हैं।
वायु सेना गौचर हवाई पट्टी को समय-समय पर अपने सैन्य अभ्यास के लिए प्रयोग करती आई है। वायु सेना और नागरिक उड्डयन के अधिकारियों ने करीब आधे घंटे तक इस मामले में विचार-विमर्श किया। हवाई जहाज की उड़ान में बाधा बन रही आसपास की पहाड़ियों पर भी चर्चा की गई।
इनमें गौचर हवाई पट्टी और इसकी सुरक्षा दीवारों को सीधा कर रखरखाव करने, दीवारों की ऊंचाई कम करने, हवाई पट्टी से सटे कालिंका देवी मंदिर के प्रतीक्षालय के बेसमेंट और लिंटर को सुरक्षा दीवारों से हटाने के साथ ही दोनों छोर पर उपलब्ध जमीन तक हवाई पट्टी को बढ़ाने के सुझाव मुख्य हैं।
वायु सेना गौचर हवाई पट्टी को समय-समय पर अपने सैन्य अभ्यास के लिए प्रयोग करती आई है। वायु सेना और नागरिक उड्डयन के अधिकारियों ने करीब आधे घंटे तक इस मामले में विचार-विमर्श किया। हवाई जहाज की उड़ान में बाधा बन रही आसपास की पहाड़ियों पर भी चर्चा की गई।
इससे पूर्व 22 अगस्त को भी किया था निरीक्षण
वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे के अवशेष कार्य को पूरा करने को कहा
चिन्यालीसौड़ में निर्माणाधीन हवाई अड्डे के स्थलीय निरीक्षण के दौरान वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे का निर्माण कार्य देख रही एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर इंजीनियर घनश्याम सिंह को अवशेष निर्माण कार्य पूरा करने को कहा।
बता दें कि इससे पूर्व 22 अगस्त को भी टीम में शामिल वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे का निरीक्षण किया था। चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम सिंह ने बताया कि वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे के अवशेष कार्य को पूरा करने को कहा है।
गौचर हवाई पट्टी कहीं-कहीं पर सेंटर से बीस और पच्चीस मीटर चौड़ी है, जबकि मानक के अनुसार बड़े हवाई जहाज के लिए इसे सेंटर से दोनों ओर न्यूनतम 30-30 मीटर चौड़ा होना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर हवाई जहाज के पंखों के टकराने का खतरा बना रहता है। इसके लिए सुरक्षा दीवारों की ऊंचाई कम करने की भी जरूरत है। इसी संबंध में वायु सेना के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श हुआ है।
- अशोक सेठी, विंग कमांडर नागरिक उड्डयन, देहरादून
बता दें कि इससे पूर्व 22 अगस्त को भी टीम में शामिल वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे का निरीक्षण किया था। चिन्यालीसौड़ हवाई अड्डे को सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर घनश्याम सिंह ने बताया कि वायुसेना के अधिकारियों ने हवाई अड्डे के अवशेष कार्य को पूरा करने को कहा है।
गौचर हवाई पट्टी कहीं-कहीं पर सेंटर से बीस और पच्चीस मीटर चौड़ी है, जबकि मानक के अनुसार बड़े हवाई जहाज के लिए इसे सेंटर से दोनों ओर न्यूनतम 30-30 मीटर चौड़ा होना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर हवाई जहाज के पंखों के टकराने का खतरा बना रहता है। इसके लिए सुरक्षा दीवारों की ऊंचाई कम करने की भी जरूरत है। इसी संबंध में वायु सेना के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श हुआ है।
- अशोक सेठी, विंग कमांडर नागरिक उड्डयन, देहरादून