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हल्द्वानी में बन रहा देश का पहला कार्बन न्यूट्रल जू
विजेंद्र श्रीवास्तव / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Fri, 19 Aug 2016 09:47 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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देश में कई चिड़ियाघर हैं, लेकिन हल्द्वानी में गौलापार में बन रहा अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर इन सबसे अलग होगा।
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इस चिड़ियाघर को कार्बन न्यूट्रल जू के रूप में विकसित किया जा रहा है और वन विभाग की कोशिश है कि इसमें ईंट, सरिया आदि की जगह केवल लकड़ी का ही उपयोग हो। 400 हेक्टेयर में बन रहे इस चिड़ियाघर में रोशनी की व्यवस्था के लिए भी सौर ऊर्जा का ही उपयोग किया जाएगा।
वन विभाग के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर में कार्बन को अवशोषित करने वाले साल, सागौन, शीशम (ग्रीन मैटेरियल) का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा। इसके निर्माण के लिए 80 करोड़ का बजट रखा गया है। ग्रीन मैटेरियल का उपयोग होने से वन विभाग की योजना लागत कम करने के साथ कार्बन उत्सर्जन के बाद बनने वाले सरिया, ईंट, सीसी ब्लॉक आदि का कम से कम इस्तेमाल करने की है।
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वन संरक्षक पश्चिमी वृत्त व चिड़ियाघर के सीईओ डॉ. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक विभाग को जंगल से साल, सागौन और शीशम के वृक्षों से लेकर लकड़ी (ग्रीन मैटेरियल) आसानी से मिल जाएगी। इनका इस्तेमाल दीवार बनाने, वन्यजीवों के बाड़े की छत बनाने से लेकर अधिकतम जगह किया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक और संवेदनशील जगहों पर स्टेनलेस स्टील के चैनलिंग फेंस, ईंट आदि का प्रयोग होगा।
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इसके अलावा जू के अंदर बिजली की व्यवस्था भी सोलर मिड, विंड मिल और हाइब्रिड मिल से अधिकतम एरिया कवर करने का है। वन विभाग इस चिड़ियाघर को कार्बन न्यूट्रल जू का नाम दे रहा है। ईंट आदि बनाने में कार्बन का उत्सर्जन होता है। कोशिश है कि इनका प्रयोग कम और कार्बन को अवशोषित करने वाले मसलन लकड़ी का प्रयोग ज्यादा किया जाए।
अगर कोई तकनीकी दिक्कत नहीं आयी तो चिड़ियाघर को दो साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें फेज-1 का काम मार्च-2017 तक पूरा करने की योजना है। चिड़ियाघर में वन्यजीवों के हिसाब से प्लांटेशन का काम शुरू कर दिया गया है।