गलवां घाटी विवाद: उत्तराखंड के चमोली से लगी चीन सीमा क्षेत्र में सेना और आईटीबीपी मुस्तैद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के चमोली से लगे चीन सीमा क्षेत्र में सेना और आईटीबीपी मुस्तैद है। लद्दाख में तनाव को देखते हुए भारी संख्या में सेना के जवान दो सप्ताह पूर्व ही सीमा क्षेत्र में चले गए थे।
गलवां घाटी विवाद: पूर्व सैनिकों की चीन को हिदायत, बोले- याद रखे ड्रैगन, ये 1962 का नहीं 2020 का भारत है
मंगलवार रात को कुछ सेना के वाहन मलारी से जोशीमठ की ओर आते दिखाई दिए। क्षेत्र में सेना की आवाजाही भी सामान्य है। जिससे अंदाज लगाया जा सकता है कि सीमा पर अभी सब कुछ ठीक है।
एसडीएम जोशीमठ अनिल चन्याल ने बताया कि सीमा क्षेत्र में सब सामान्य है। आईटीबीपी की ओर से न तो स्थानीय लोगों की आवाजाही रोकी गई है और न ही बुग्यालों में पहुंचे भेड़ बकरी चरवाहों को वापस भेजने को लेकर कोई बात की है।
नाभीढांग से लिपुपास तक आठ किमी के दायरे में सुरक्षा बढ़ाई
लद्दाख की गलवां घाटी में चीन की सेना से हिंसक झड़प के बाद पिथौरागढ़ में चीन सीमा के नाभीढांग से लिपुपास तक आठ किमी के दायरे में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस क्षेत्र में आईटीबीपी के साथ भारतीय सेना ने भी गश्त शुरू कर दी है। फिलहाल यहां तनाव की स्थिति नहीं है।
भारत नेपाल सीमा भी हाई अलर्ट पर है। हालांकि सीमा पर पहले से ही सघन पेट्रोलिंग जारी है। मंगलवार सुबह से सीमा पिलरों के आसपास एसएसबी ने निगरानी बढ़ा दी। बिहार सीमा पर पिलर गायब होने व चीन से झड़प में भारतीय सैनिकों के मारे जाने के बाद से यहां चौकसी बढ़ा दी गई है।