स्वतंत्रता दिवस: अाजादी के इन दीवानों ने अंग्रेजों की नाक के नीचे किया ऐसा काम जानकर करेंगे सलाम
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गंगा की इस पावन धरती पर वर्ष भर मेले ही नहीं लगते, यहां स्वाधीनता आंदोलन का इतिहास भी रचा गया है।
आजादी के दीवाने अंग्रेजों की खिलाफ अपनी मशालें रातभर जलाते रहे हैं। श्रद्धानंद के गुरुकुल ने क्रांतिकारियों को पनाह दी तो ऋषिकुल के अमर शहीद जगदीश वत्स ने अंग्रेजों की नाक के नीचे तीन प्रमुख स्थलों पर तिरंगा फहराकर वीरगति प्राप्त की। जब स्वतंत्रता आंदोलन चल रह था तब गंगापार कांगड़ी निर्मल क्षेत्र में वीतराग स्वामी श्रद्धानंद गुरुकुल के माध्यम से देश पर मर मिटने वाले क्रांतिवीर तैयार कर रहे थे। गुरुकुल से निकाले अनेकों संपादकों ने पराधीन भारत में पत्रकारिता की मशाल जलाई। गुरुकुल का इतना नाम हुआ की महात्मा गांधी यहां दो बार आए और खुद वायसराय ने गुरुकुल की शैक्षिक गतिविधियों की सराहना की।
अंग्रेजों के जुल्मों से बचने के लिए बटुकेश्वर दत्त, वीर सावरकर, दीपदास सान्याल, लाहड़ी महाशय, सच्चिदानंद बसु आदि क्रांतिकारियों ने श्रद्धानंद के गुरुकुल में शरण ली। इतिहासकार डा. सत्यकेतु विद्यालंकार के अनुसार गुरुकुल के क्रांतिकारियों ने हरिद्वार के पंडों के पास आए यजमानों के माध्यम से अनेक गुप्त संदेश देश भर में फैलाए। क्रांतिकारी गले में नकली अस्थियां टांगकर गुरुकुल में गुप्त से रहकर क्रांति संचालन कर रहे क्रांतिकारियों तक संदेशे आते भी थे। तीर्थ पुरोहित बड़े गुप्त ढंग से क्रांतिकारियों के संदेश प्रसाद में मिलाकर यजमानों के माध्यम से देश भर में भिजवाते थे।
इन वीरों ने भी उठाई मशाल
उसी दौर में ऋषिकुल के स्नातक जगदीश वत्स ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ऐतिहासिक सुभाष घाट पर तिरंगा फहराने की ठानी। उन्होंने एक नहीं तीन तिरंगे अपने साथ लिए। कुछ साथियों के साथ वंदेमातरम गाते जगदीश वत्स सुभाष घाट पहुंचे और देखते ही देेखते तिरंगा फहरा दिया।
जगदीश वत्स की जानकारी जैसे ही अंग्रेज पुलिस को मिली वह सुभाष घाट की तरफ दौड़ी। जगदीश वत्स पर तो मानो दीवानगी सवार थी। वे अपने चंद साथियों के साथ भारतमाता के तराने गाते हुए कोतवाली पहुंचे और बगल में स्थित डाकघर पर तिरंगा फहरा दिया। आजादी का यह दीवाना लोगों से साथ आने का आह्वान करता हुआ रेलवे स्टेशन की ओर बढ़ा। उसने स्टेशन की छत पर चढ़कर जैसे ही तिरंगा फहराया, तब तक वहां पहुंच चुकी अंग्रेज पुलिस के कोतवाल ने उन्हें छत पर ही गोलियों से भून दिया। आजादी का यह दीवाना राष्ट्र की वेदी पर शहीद हो गया। जगदीश वत्स की स्मृति में हरिद्वार में शहीद पार्क की स्थापना की गई है।
आजादी के आंदोलन की मशाल अनेक क्रांतिकारियों ने उठाई। इनमें पंडित हरि प्रसाद पटुवर, श्यामलाल वैद्य, कृष्ण दत्त मिश्र, ओम प्रकाश गांधी, वैद्य सोमदत्त, रामजी दास पटुवर, वासुदेव ठेकेदार, कृष्णलाल धींगड़ा, नंदलाल धींगड़ा, कौशल्या देवी, सरदार बलवंत सिंह, केशवराम बेरी, त्रिलोकनाथ सरीन, चौधरी राम भज, वैद्य विष्णु दत्त, हीरा वल्लभ त्रिपाठी, हरिदत्त बहुगुणा, आचार्य किशोरी दास वाजपेयी, बेणी प्रसाद जिज्ञासु, लीलावती, शकुंतला देवी, आरडी कौशिक आदि प्रमुख हैं।