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Dehradun News: फर्जी रजिस्ट्री घोटाले का मुख्य आरोपी इमरान और एक रजिस्ट्रार कर्मी गिरफ्तार

Fri, 18 Aug 2023 08:42 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Fri, 18 Aug 2023 08:42 PM IST
सार

इससे पहले पुलिस देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात कर्मचारी डालचंद के साथ ही असम (डिब्रूगढ़) निवासी दो टिंबर व्यापारी भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।

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Dehradun Newsmain accused in fake registry scam  Imran and a registrar employee arrested
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

रायपुर स्थित टी-स्टेट की 12.5 एकड़ जमीन की फर्जी रजिस्ट्री घोटाले के मामले में फरार चल रहे मुख्य आरोपी एडवोकेट इमरान और एक रजिस्ट्रार कर्मी अजय क्षेत्री को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को गुरुवार देहरादून सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया हैं। आरोपी अजय रजिस्ट्रार कार्यालय में बाइडिंग का कार्य करता था।

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इससे पहले पुलिस देहरादून रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात कर्मचारी डालचंद के साथ ही असम (डिब्रूगढ़) निवासी दो टिंबर व्यापारी भाइयों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। मामले में पुलिस की जांच जारी है। अभी और कई लोग गिरफ्तार हो सकते हैं।
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विदित है कि रायपुर (चक) स्थित टी-स्टेट की 12.5 एकड़ भूमि की फर्जी रजिस्ट्री व दस्तावेज तैयार कर करोड़ों की हेराफेरी का मामला सामने आया था। पुलिस खुलासे के मुताबिक मास्टरमाइंड एडवोकेट इमरान अहमद सहित अन्य लोगों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत पहले रायपुर स्थित टी-स्टेट जमीन के फर्जी रजिस्ट्री तैयार कीं और फिर उन दस्तावेजों को रजिस्ट्रार ऑफिस में तैनात कर्मचारी डालचंद की मदद से रिकॉर्ड दस्तावेजों से बदला। फिर उन्हीं जाली दस्तावेजों के आधार पर इस बेशकीमती जमीन को करोड़ों में बेच दिया।
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इस मामले में पुलिस ने 12 अगस्त को असम डिब्रूगढ़ के टिंबर व्यापारी संतोष अग्रवाल, दीप चन्द अग्रवाल व रजिस्ट्रार कार्यालय में नियुक्त कर्मचारी डालचंद को गिरफ्तार था। पूछताछ में कुछ और लोगों के नाम भी सामने आए थे। बृहस्पतिवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी एडवोकेट इमरान अहमद निवासी 226/2 आकाशदीप काॅलोनी बल्लूपुर रोड़ को नेहरू कॉलोनी क्षेत्र से, जबकि रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात कर्मचारी अजय सिंह क्षेत्री निवासी गांधी नगर को बल्लपुर क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

एडवोकेट इमरान और केपी करते थे टी-स्टेट की खाली जमीनों के कागज तैयार
इमरान में इमरान ने पुलिस को बताया कि अन्य सहयोगियों के माध्यम से उसकी मुलाकात सहारनपुर निवासी केपी सिंह (कुंवरपाल सिंह) से हुई थी। इमरान रजिस्ट्रार कार्यालय में नियुक्त अजय के साथ मिलकर खाली पड़ीं विवादित जमीनों के कागजात जिल्द फाइलों से निकालकर केपी सिंह को देता था। इसके बाद केपी सिंह अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उन कागजातों की फर्जी रजिस्ट्रियां बनाकर उनकी प्रतियां उन्हीं फाइलों में अजय के माध्यम से लगवा देते थे।
अजय ने बताया कि वह केपी सिंह के संपर्क में काफी समय से था। केपी ने उसे लालच दिया था, जिसके कारण वह रिकॉर्ड रूम से बरसों पुरानी जिल्द फाइलों से निकालकर उन्हें देता था और फिर फर्जी जिल्द उन फाइलों में लगा देता था। इसके बाद केपी, इमरान व उसके अन्य सहयोगी संबंधित भूमियों पर कब्जा कर विभिन्न प्रॉपर्टी डीलरों के माध्यम से बेच देते थे। जिसका मुनाफा वे आपस में बांट लेते थे।

आरोपियों ने जमीन बेचकर कमाया 15 करोड़ से अधिक का मुनाफा
पुलिस जांच में सामने आया कि बाइंडर अजय ने वर्ष 1984-85 व वर्ष 1980 की जिल्द फाइलों में से ऐसे कागजात जो लोन, लीज, किरायेनामा आदि से संबंधित थे, फाइलों से निकालकर केपी सिंह को दिए। जिसके बाद आरोपियों ने रिंग रोड, रानीपोखरी, नवादा आदि की जमीनों की अपने आदमियों के नाम पर फर्जी रजिस्ट्रियां कर दस्तावेज तैयार किए। इस खेल में उन्होंने लगभग 15 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया।

अजय को दिया था 45 लाख का प्लॉट व 15 लाख रुपये
केपी सिंह ने इस काम के लिए अजय क्षेत्री को रिंग रोड पर करीब 45 लाख का 166 गज का एक प्लाॅट दिया था। इसके साथ ही 15 लाख की आर्थिक मदद भी की थी। पुलिस ने अजय के कब्जे से रिंग रोड पर खसरा नंबर 1584 रकबा 166 गज भूमि प्लॉट की रजिस्ट्री व उसके बैंक अकाउंट की पासबुक बरामद की है। पासबुक में लाखों रुपये की लेनदेन मिली है।

केपी सिंह और अन्य की तलाश में पुलिस दे रही दबिश
पुलिस के अनुसार इस मामले में केपी सिंह के अलावा अन्य कई लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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