IMA POP 2021 : किसी ने पूरी की नाना की इच्छा तो कहीं अफसर बेटे को सैल्यूट कर फफक पड़े पिता
देश को युवा अफसर देने में उत्तर प्रदेश 66 कैडेटों के साथ अव्वल रहा। हरिणाया 38 कैडेटों के साथ दूसरे स्थान पर और काफी कम जनसंख्या होने के बाद भी उत्तराखंड 37 अफसरों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इसी वर्ष 10वीं गढ़वाल राइफल से हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए जयप्रकाश भट्ट के सामने शनिवार को जब बेटा सुमित सैन्य अफसर की वर्दी में पहुंचा तो वो अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। बेटे को सैल्यूट किया और फफक पड़े। उन्होंने कहा कि किसी भी पिता के लिए इससे बड़े गौरव का क्षण नहीं हो सकता कि वो अपने अफसर बेटे को सैल्यूट करे।
IMA POP 2021 : भारतीय सेना का हिस्सा बने 341 कैडेट, तस्वीरों में देखें उनकी आन, बान और शान
मूलत: मानपुर, भटवाड़ी, उत्तरकाशी निवासी जयप्रकाश भट्ट और तामेश्वरी भट्ट के बेटे सुमित ने उन्हें शनिवार को ऐसी खुशी दी, जिसे वह जिंदगी भूलना नहीं चाहेंगे। 2015 में उत्तरकाशी से हाईस्कूल करने के बाद सुमित ने केवी ओएनजीसी से 11वीं व 12वीं की पढ़ाई की। बचपन से ही बेहद कुशाग्र बुद्धि के सुमित ने पहले ही प्रयास में एनडीए में सफलता हासिल कर ली।
आईएमए पासिंग आउट परेड 2021 : सरहद की निगहबानी के लिए देश को आज मिलेंगे 341 जांबाज
पिता ने बताया कि दादा सुरेंद्र प्रसाद भट्ट हमेशा चाहते थे कि सुमित भारतीय सेना में अफसर बने। शनिवार को जब उन्होंने अफसर की वर्दी पहनी तो पूरे परिवार के लिए यह बेहद गौरान्वित करने वाला क्षण था।
पिता जयप्रकाश ने कहा कि मैं सिपाही के तौर पर भर्ती हुआ। लेकिन मैंने हमेशा चाहा कि मेरा बेटा सेना में अफसर बने। मैं अपने बेटे को सैल्यूट करूं। अब सुमित को 3/8 गोरखा राइफल्स में तैनाती मिली है। उनका परिवार एमबी होम, आर्मी हॉस्टल में निवास करता है।
फौजी मामा ने सेना में अफसर बनने का सपना दिखाया
फौजी मामा ने कोट बागेश्वर निवासी भरत सिंह फरस्वाण को बचपन में सेना में अफसर बनने का सपना दिखाया। शनिवार को जब भरत भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर बतौर अफसर भारतीय सेना में शामिल हुए तो मामा समेत पूरे परिवार की खुशी की ठिकाना नहीं रहा। भरत के पिता हरीश फरस्वाण किसान और मां पार्वती देवी गृहणी हैं।
उनकी प्राथमिक शिक्षा कोट स्थित से ही हुई। छठवीं से 12वीं तक सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने भारतीय सेना को अपना लक्ष्य बना लिया। मामा बहादुर सिंह कोरंगा खुद फौज में थे। वो हमेशा भरत को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते। उनके कहने पर ही भरत का एडमिशन सैनिक स्कूल में कराया गया।
2017 में एनडीए में चयनित होने के बाद उनका अफसर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ। भरत के बड़े भाई दीपक फरस्वाण हॉस्पिटेलिटी सेक्टर में कार्यरत हैं, जबकि बहन की शादी हो चुकी है। उनके अफसर बनने पर परिवार के साथ ही स्थानीय लोगों ने भी खुशी जताई है ।
लेफ्टिनेंट नवीन पंत ने पूरी की नाना की आखिरी इच्छा
लेफ्टिनेंट नवीन पंत जब शनिवार को आईएमए से पास आउट होने के बाद पहली बार घर पहुंचे तो उनकी बुजुर्ग नानी ने सैल्यूट कर स्वागत किया। दोनों की आखों से आंसू बह निकले। दरअसल नवीन के स्व. नाना की आखिरी इच्छा थी कि सबसे पहले नाना उन्हें सैल्यूट करें।
मूलत: पौड़ी के पोखड़ा के एरोली मल्ली गांव निवासी नवीन पंत के आईएमए में चयनित होने के बाद उनके नाना ने कहा कि जब वो अफसर बनकर घर आएंगे तो सबसे पहले वही उन्हें सैल्यूट करेंगे। हालांकि इसी बीच उनकी तबियत बिगड़ गई और उनका निधन हो गया।
तब उन्होंने अपनी पत्नी (नवीन की नानी) बसंती देवी सुंदरियाल से कहा कि मैं तो अपने नवीन को सैल्यूट नहीं मार पाया, लेकिन तुम उसे जरूर सैल्यूट करना। उन्होंने नवीन से वादा लिया कि वो सबसे पहले अपनी नानी के सामने आएंगे। पिता हवलदार (सेनि.) और मां ऊषा पंत अपने सबसे छोटे बेटे की इस बड़ी उपलब्धि पर फूले नहीं समाए।
उन्होंने बताया कि नवीन की आठवीं तक की शिक्षा केंद्रीय विद्यालय हाथीबड़कला नंबर वन और नौवीं से 12वीं तक सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में हुई। 12वीं के साथ ही नवीन का चयन एनडीए के लिए हो गया। चार साल की बेहद मुश्किल ट्रेनिंग के बाद उन्हें बतौर अफसर 12 ग्रेनेडियर में नॉर्थ ईस्ट में तैनाती मिली है।
सूबेदार पिता ने सजाए बेटे के कंधे पर सितारे
कीर्तिनगर ब्लॉक के कणोली गांव को शनिवार को पहला सैन्य अफसर मिला। गांव के अंकित बड़ोनी भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होने के बाद भारतीय सेना का हिस्सा बने। पिता सूबेदार (सेनि.) राजेश बड़ोनी और मां वंदना बड़ोनी ने बेहद गर्व और सम्मान के साथ अंकित के कंधे पर सितारे सजाए। पिता ने लेफ्टिनेंट बेटे को सैल्यूट किया और उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कुकड़ई गांव के रजत नेगी बने सेना में अफसर
तहसील कर्णप्रयाग के कुकड़ई गांव के रजत नेगी आईएमए देहरादूून में हुई पासिंग आउट परेड के बाद सेना में अफसर बने हैं। मध्यम परिवार के रजत नेगी का बचपन से ही सेना में जाकर देश की सेवा करने का सपना था, जो अब पूरा हो गया है। 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद उनका पहले ही प्रयास में एनडीए में चयन हो गया था।
रजत नेगी ने आदर्श विद्या मंदिर कर्णप्रयाग से हाईस्कूल की परीक्षा पास करने के बाद 2016 में एसजीआरआर से 12वीं पास की। एनडीए में चयन होने पर पुणे से तीन साल की ट्रेनिंग के बाद आईमए देहरादून में एक साल का सैन्य प्रशिक्षण लिया। उनके पिता सुजान सिंह नेगी जीआईसी केदारूखाल में अंग्रेजी विषय में सहायक अध्यापक और माता विमला देवी गृहणी हैं।
रजत के सीनियर अंडर ऑफिसर के रूप में कमांडर बनने पर उनके गांव कुकड़ई सहित कर्णप्रयाग में खुशी का माहौल है।
उत्तरकाशी के रजत और अमन बने अफसर
भारतीय सेना अफसर बने रजत भंडारी व अमन रमोला ने शनिवार को आईएमए पासिंग आउट परेड में उपस्थिति दर्ज कराकर जिले का मान बढ़ाया।
मूलरूप से टिहरी के करोली कंगसाली निवासी रजत भंडारी (22) के पिता सोबन भंडारी निम में प्रशिक्षक व माता एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। रजत की दसवीं तक की शिक्षा जिला मुख्यालय स्थित एक निजी स्कूल से हुई। उसके बाद उन्होंने ऋषिकेश से इंटर और कंप्यूटर साइंस में स्नातक के लिए दिल्ली के एक कॉलेज में एडमिशन लिया।
वहां पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन संयुक्त रक्षा सेवा (सीडीएस) के लिए हुआ। रजत भंडारी ने बताया कि उनका लक्ष्य शुरू से ही देश सेवा के लिए सेना में जाने का था। उन्होंने सीडीएस की तैयारी कर रहे युवाओं से गणित, अंग्रेजी व सामान्य अध्ययन पर फोकस करने की बात कही।
इधर, चिन्यालीसौड़ के बधाणगांव निवासी अमन रमोला (21) ने भी सेना में अफसर बनकर जिले का नाम रोशन किया है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय मां यशोदा रमोला, भाई अंतरिक्ष रमोला व गुरुजनों को दिया। अमन ने एनडीए के जरिये आईएमए तक का सफर तय किया।