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भगवान भरोसे जल संस्थान की संपत्ति, ट्यूबवेलों पर भी मैकेनिकों और ठेकेदारों का कब्जा

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2020 05:45 PM IST
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illegal possession in jal sansthan tubewels
- ट्यूबवेल में प्राइवेट ठेकेदारोंने बना रखी है वर्कशॉप, कोई देखने वाला नहीं - नियमानुसार अपनी ही वर्कशॉप में कर सकते हैं काम, जल संस्थान के संसाधन नहीं हो सकते इस्तेमाल माई सिटी रिपोर्टर देहरादून। जल संस्थान में कई व्यवस्थाएं राम भरोसे चल रहीं हैं। किसी की निगाह नहीं तो अब ट्यूबवेलों पर भी ठेकेदार अपनी वर्कशॉप चला रहे हैं। अपना काम भी जल संस्थान के संसाधन इस्तेमाल कर किया जा रहा है। बार बार ऐसे मामलों की शिकायत भी जल संस्थान को मिलती है मगर कार्रवाई एकाध जगह ही होती है। ऐसे में धड़ल्ले से जल संस्थान का संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। ताजा मामला चन्दर नगर स्थित ट्यूबवेल का है। यहां चारो तरफ बस ठेकेदार का ही समान और कबाड़ नजर आता हैम संस्थान के सूत्रों के मुताबिक बड़े ठेकेदार की बड़ी ही पैठ है। लिहाजा कुछ कर्मचारियों से सांठगांठ के चलते अब उसने वर्कशॉप भी यहीं चलाना शुरू कर दिया है। अधिकारी आते हैं मगर कभी यहां फैले कबाड़ के बारे में कुछ नहीं कहा जाता है।  दरअसल, जल संस्थान के अधिकतर ट्यूबवेल अब ऑटोमेशन मोड पर संचालित होते हैं। ऐसे में यदि किसी ट्यूबवेल पर कोई खराबी होती है तभी वहां पर कर्मचारियों का आना जाना होता है। अन्यथा उसे ऐसे ही राम भरोसे छोड़ दिया जाता है। नियमानुसार ठेकेदार अपनी वर्कशॉप में काम करते हैं और मोटर आदि ट्यूबवेल में डाले जाते हैं। जबकि ठेकेदार यहां काम करते हैंतो बिजली भी संस्थान की ही फुंकती है। ---// पित्थुवाला में हुई थी कार्रवाई ऐसा ही मामला पित्थुवाला ट्यूबवेल पर भी सामने आया थम यहां ठेकेदार ने ही अपना सामान डालकर कब्जा किया हुआ था। इसकी जब शिकायत हुई तो अधिकारियों ने यहां छापा मारकर कार्रवाई की और वहां से ठेकेदार को बेदखल किया। ----- क्वार्टर में भी ठेकेदार के आदमियों के आवास जल संस्थान के सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों के लिए जो सरकारी आवास बनाये हुए हैं उनमें भी ठेकेदारों के आदमियों का ही कब्जा है। समय समय पर इनकी शिकायत भी होती है मगर आजतक कोई कार्रवाई नहीं कि गाई।  ------- पहले हम कार्रवाई कर चुके हैं। इस तरह की अब भी कहीं शिकायत है तो संबंधित व्यक्ति को बाहर निकाला जायेगा। अधिकतर ट्यूबवेल अब ऑटोमेशन पर चल रहे हैं। ऐसे में वहां किसी सामान आदि की तो जरूरत ही नहीं है। जहां तक सरकारी आवसों की बात है तो उसकी भी पड़ताल की जाएगी।- नीलिमा गर्ग, जीएम मुख्यालय
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