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IIT में अंग्रेजी की 'हुकूमत' युवाओं पर पड़ रही भारी

Sun, 12 Jul 2015 05:45 PM IST
अंकित कुमार गर्ग / अमर उजाला, रुड़की
अंकित कुमार गर्ग / अमर उजाला, रुड़की Updated Sun, 12 Jul 2015 05:45 PM IST
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आईआईटी में इंजीनियरिंग विषयों में अंग्रेजी की

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हुकूमत हिंदी पर भारी पड़ रही है। आईआईटी रुड़की से निकाले गए ज्यादातर छात्रों की शिकायत है कि अंग्रेजी को नहीं समझ पाने के कारण बेहतर रिजल्ट नहीं दे पाए।


वहीं दूसरी ओर संस्थान में अब दो वर्ष की जगह एक वर्ष का अंग्रेजी का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। वहीं अंग्रेजी विषय में चार सेमेस्टर में आठ क्रेडिट निर्धारित थे। अब क्रेडिट भी घटकर चार रह गए हैं।

आईआईटी से निकाले गए छात्रों के अभिभावकों की माने तो ज्यादातर छात्र पहले साल में अंग्रेजी विषय में कमजोर होने के चलते मेहनत के बावजूद अच्छी परफॉरमेंस देने में सफल नहीं हुए।
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कुशीनगर उत्तरप्रदेश निवासी अभिभावक दिलीप कुमार का कहना था कि विभिन्न प्रदेशों आने वाले छात्रों में मेधा की कमी नहीं है लेकिन यहां कठिन विषयों के साथ-साथ अंग्रेजी में पढ़ाई को ठीक से नहीं समझ पाने के कारण छात्रों की मुश्किलें बढ़ी हैं।

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दो साल तक अंग्रेजी पाठ्यक्रम की क्लास है अनिवार्य

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वहीं दूसरी ओर, संस्थान की ओर से अंग्रेजी विषय पर जोर देना कम कर दिया गया है। तीन साल पहले संस्थान में प्रवेश पाने वाले छात्रों के लिए दो साल तक अंग्रेजी पाठ्यक्रम की क्लास अनिवार्य थी।

इसके लिए दो साल के चार सेमेस्टर में छात्रों को आठ क्रेडिट मिलते थे। लेकिन अब पहले साल के दो सेमेस्टर में ही अंग्रेजी पढ़ाई जाती है। जिसके लिए छात्रों को चार क्रेडिट मिलते हैं।

गौरतलब है कि क्रेडिट के हिसाब से छात्रों का सीजीपीए भी निर्धारित होता है। ऐसे में बड़ी मात्रा में छात्रों के सेमेस्टर परीक्षाओं में कम स्कोर पाने के बाद अब अंग्रेजी विषय की पढ़ाई पर गंभीरता से सोचने की जरूरत होगी।

प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए अंग्रेजी विषय की क्लासेज अनिवार्य है। इसके लिए परीक्षाफल में क्रेडिट भी निर्धारित है। कुछ साल पहले छात्रों दो वर्ष तक अंग्रेजी पढ़ाई जाती थी। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को अंग्रेजी के कारण हो रही समस्या का समाधान करना है।
- डॉ. नागेंद्र कुमार, अंग्रेजी विभाग प्रोफेसर एवं प्रभारी हिंदी सैल

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