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कोई कोरोना पॉजिटिव हुआ तो सीएम पर दर्ज कराएंगे हत्या का मुकदमा
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उत्तराखंड का कोई भी नागरिक कांवड़ यात्रा से पॉजिटिव हुआ तो रूरल लिटिगेशन एंड इनटाइटलमेंट केंद्र (रूलक) राज्य सरकार के खिलाफ कोर्ट जाएगा। वहीं, अगर किसी की मौत हुई तो मुख्यमंत्री के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। रूलक के संस्थापक पद्मश्री अवधेश कौशल ने यह चेतावनी देते हुए कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
उन्होंने लिखित बयान जारी कर मुख्यमंत्री से यात्रा को अनुमति न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कांवड़ यात्रा के आयोजन को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। अधिकारी भी उन्हें वास्तविक स्थिति बताने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। कौशल ने कहा कि कांवड़ यात्री न तो मास्क पहनेंगे और न ही कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करेंगे। कई श्रद्धालु तो अनिवार्य होने के बावजूद 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेकर भी नहीं आएंगे। इस लिहाज से देखा जाए तो कांवड़ यात्रा शुरू करना उत्तराखंड के लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ही बड़ी संख्या में लोग कोरोना से पीड़ित और परेशान हैं, ऐसे में बीमारी को बढ़ाने वाले आयोजनों से बचना ही बेहतर होगा।
कौन हैं पद्मश्री अवधेश कौशल
पद्मश्री अवधेश कौशल मूलत: शैक्षणिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कई वर्ष तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में प्रशासन पढ़ाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में उन्हें ग्रामीण रोजगार गारंटी की निगरानी के लिए नियुक्त किया। 2005 में उन्हें फ्रेंडस ऑफ ट्राइबर सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे एकल विद्यालय के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई। उनके रिपोर्ट का पालन करते हुए एमएचआरडी ने ऐसे स्कूलों का वित्त पोषण वापस ले लिया। उनके कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री प्रदान किया। उनकी याचिका पर ही कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी कोठी खाली कराने और खर्च की वसूली करने के आदेश दिए थे।
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उन्होंने लिखित बयान जारी कर मुख्यमंत्री से यात्रा को अनुमति न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कांवड़ यात्रा के आयोजन को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। अधिकारी भी उन्हें वास्तविक स्थिति बताने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। कौशल ने कहा कि कांवड़ यात्री न तो मास्क पहनेंगे और न ही कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करेंगे। कई श्रद्धालु तो अनिवार्य होने के बावजूद 72 घंटे पहले की आरटीपीसीआर रिपोर्ट लेकर भी नहीं आएंगे। इस लिहाज से देखा जाए तो कांवड़ यात्रा शुरू करना उत्तराखंड के लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ही बड़ी संख्या में लोग कोरोना से पीड़ित और परेशान हैं, ऐसे में बीमारी को बढ़ाने वाले आयोजनों से बचना ही बेहतर होगा।
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कौन हैं पद्मश्री अवधेश कौशल
पद्मश्री अवधेश कौशल मूलत: शैक्षणिक और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कई वर्ष तक मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में प्रशासन पढ़ाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हाल ही में उन्हें ग्रामीण रोजगार गारंटी की निगरानी के लिए नियुक्त किया। 2005 में उन्हें फ्रेंडस ऑफ ट्राइबर सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे एकल विद्यालय के कामकाज की समीक्षा की जिम्मेदारी दी गई। उनके रिपोर्ट का पालन करते हुए एमएचआरडी ने ऐसे स्कूलों का वित्त पोषण वापस ले लिया। उनके कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री प्रदान किया। उनकी याचिका पर ही कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी कोठी खाली कराने और खर्च की वसूली करने के आदेश दिए थे।
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