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उत्तराखंड: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी की मंत्री को सीआर लिखने के अधिकार की वकालत

Sat, 26 Sep 2020 04:36 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 26 Sep 2020 04:36 PM IST
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ias v shanmugam case: minister raise question, how one ias can investigate the other
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत - फोटो : Bansidhar Bhagat / Facebook Page

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने भी की मंत्री को सीआर लिखने के अधिकार की वकालत की है। कहा है कि इससे अफसर पर दबाव बनेगा और वह अंकुश में रहेगा। उन्होंने राज्यमंत्री रेखा आर्य के मामले में कहा कि मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश कर दिए हैं। अब हमें जांच रिपोर्ट का इंतज़ार करना चाहिए।

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राज्य मंत्री रेखा आर्य ने जांच पर उठाए सवाल

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्य मंत्री रेखा आर्य ने आईएएस अधिकारी से विवाद के मामले में घोषित की गई जांच पर सवाल उठाए हैं। रेखा आर्य ने कहा कि पहला सवाल तो यही है कि क्या एक आईएएस दूसरे आईएएस की जांच कर पाएगा? उन्होंने यह भी पूछा है कि जांच में अगर आईएएस दोषी पाया जाता है तो क्या कार्रवाई की जाएगी?
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रेखा आर्य के मुताबिक वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से जांच के आदेश का स्वागत करती हैं। लेकिन इसमें एक सवाल है कि यह जांच कितनी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। बता दें कि रेखा आर्य ने अपने विभागी अधिकारी वी षणमुगम के खिलाफ पुलिस से शिकायत की थी कि अधिकारी तीन दिन से गायब हैं।
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इस विवाद के तूल पकड़ने पर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे और एसीएस मनीषा पंवार को जांच अधिकारी बनाया था। शुक्रवार को रेखा आर्य ने इसी पर सवाल उठाया। उन्होंने यह भी कहा कि जांच में वे अगर दोषी पाई जाती हैं तो वे सीएम या क्षेत्र की जनता की ओर से निर्धारित हर दंड को भुगतने के लिए तैयार हैं, वह इसे स्वीकार करेंगी। 

षणमुगम ने सीएस को लिखा पत्र कहा- मेरा विभाग बदल दिया जाए

महिला कल्याण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य और निदेशक वी षणमुगम के बीच तल्खियां बढ़ती जा रही हैं। दोनों ने ही मुख्य सचिव ओम प्रकाश को पत्र लिखे हैं। षणमुगम ने पत्र में मुख्य सचिव ओम प्रकाश से उनका विभाग बदलने का अनुरोध किया है।

इस बीच आईएएस एसोसिएशन ने भी मुख्य सचिव से मुलाकात की। उन्होंने षणमुगम के संबंध में पुलिस को दिए पत्र की भाषा पर आपत्ति जताई है। माना जा रहा है कि एसोसिएशन के सदस्यों ने षणमुगम के मामले में पक्ष रखा। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक षणमुगम ने मुख्य सचिव को तीन पन्नों का पत्र लिखा है। यह पत्र उन्होंने शाम के समय मुख्य सचिव कार्यालय पहुंचाया।

इस पत्र में उन्होंने टेंडर प्रक्रिया से लेकर खुद के होम क्वारंटीन होने तक का पूरा विवरण लिखा है। साथ ही उन्होंने मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि उनका विभाग बदल दिया जाए। इस तरह से उन्होंने राज्यमंत्री के साथ काम करने की अनिच्छा जाहिर कर दी है। इस संबंध में वी षणमुगम से काफी प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। जैसे ही उनका पक्ष प्राप्त होगा, उसे हूबहू प्रकाशित किया जाएगा। 

शिकायतों की हो रही है जांच सीआर लिखने का है अधिकार

शासकीय प्रवक्ता और शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक का कहना है कि महिला सशक्तीकरण और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर अधिकारी के खिलाफ जांच की जा रही है। मदन कौशिक के मुताबिक यह आरोप पूरी तरह से बेबुुनियाद है कि महिला सशक्तीकरण मंत्री रेखा आर्य भी जांच के दायरे में हैं। मीडियाकर्मियों के सवालों का जवाब देते हुए कौशिक ने कहा कि मंत्री ने मामले की शिकायत की है तो जांच भी मंत्री की ओर से की गई शिकायत पर ही हो रही है।

रेखा आर्य ने कुछ दिन पहले ही विभागीय अधिकारी के खिलाफ पुलिस को पत्र जारी कर कहा था कि अधिकारी तीन दिन से लापता हैं, उनको खोजा जाए। राज्यमंत्री ने पत्र में अधिकारी के अपहरण होने या उनके भूमिगत होने तक की आशंका जताई थी। इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद मंत्री अफसरों के बीच संबंधों को लेकर बवाल उठ खड़ा हुआ था।

मंत्री ने मुख्य सचिव से कहा सचिव और निदेशक का किया जाए जवाब तलब

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री रेखा आर्य ने विभाग के निदेशक के गायब होने एवं टेंडर प्रक्रिया को लेकर मुख्य सचिव को छह पेज का पत्र लिखकर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने को कहा है।
विभाग की राज्यमंत्री ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि विभाग के अधिकारी उनके आदेशों की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।

18 सितंबर 2020 को उनके संज्ञान में आया कि जुलाई 2020 में भी एक बार बिना उनके अनुमोदन के निदेशक ने टेंडर निकाला था। इसमें धांधली का आरोप लगने पर निदेशक ने एक जांच बैठाई और टेंडर को निरस्त कर दिया। जांच रिपोर्ट में चार कर्मचारियों को दोषी पाया। दोषी पाए गए कर्मचारियों में से दो पर निदेशक ने कार्रवाई की। लेकिन अन्य दो कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

विभागीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान मामले में शिकायत मिलने पर उन्होंने विभाग के निदेशक और सचिव को फोन किया। सचिव ने फोन रिसीव नहीं किया वहीं निदेशक का फोन बंद मिला।

21 सितंबर को उन्होंने विभाग की सचिव सौजन्य को टेंडर प्रक्रिया की कार्रवाई रोककर पत्रावली प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। लेकिन सचिव का कहना था कि मामले में लिखित आदेश के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। इस पर उन्होंने सचिव को लिखित आदेश जारी किया। इसके बावजूद उन्हें टेंडर से संबंधित पत्रावली नहीं मिली। बाद में पता चला कि निदेशक की ओर से एक कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया।

जब से कार्यभार संभाला निर्देश का नहीं किया पालन

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री रेखा आर्य ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा कि विभाग के निदेशक ने जब से कार्यभार संभाला उनकी ओर से दिए गए निर्देश का पालन नहीं किया। इनकी कार्यप्रणाली के चलते विभाग के कर्मचारी इनके साथ कार्य करने में असमर्थता जता चुके हैं।

सरकार से वेतन लेने वाले निष्क्त्रिस्य अफसर सबसे बड़े भ्रष्टाचारी : रेखा

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग की राज्यमंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार से वेतन लेने वाले निष्क्रिय अफसर सबसे बड़े भ्रष्टाचारी हैं। वहीं उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि इस पूरे प्रकरण की वह किसी भी जांच एजेंसी से जांच के लिए तैयार हैं। सरकार चाहे तो देश की सबसे बड़ी एजेंसी से मामले की जांच कराएं और जो कोई भी दोषी हो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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