फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   hydro power project reason for uttarakhand flood

उत्तराखंड आपदा पर हुआ एक नया खुलासा

Wed, 30 Apr 2014 01:45 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून
टीम डिजिटल / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 30 Apr 2014 01:45 PM IST
विज्ञापन
hydro power project reason for uttarakhand flood

उत्तराखंड में पिछले साल आई आपदा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2014 में ही राज्य में कोई भी नई पनबिजली परियोजना शुरू करने पर रोक लगा दी थी।

विज्ञापन


इसके बाद अदालत ने ऐसी परियोजनाओं से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक किसी भी पनबिजली परियोजना को पर्यावरण या वन संबंधी मंजूरी नहीं दी जाए।
विज्ञापन

समिति ने सुप्रीम कोर्ट को यह रिपोर्ट सौंपी

hydro power project reason for uttarakhand flood

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक 11 सदस्यीय समिति ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में समिति ने पनबिजली परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने के मसले पर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पनबिजली परियोजनाओं को मंजूरी देते समय ईको सेंसिटिव जोन और पर्यावरणीय प्रभाव को समुचित आकलन और अध्ययन नहीं किया गया।

समिति ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि ऐसी जगहों पर इस तरह के पावर प्रोजेक्ट लगाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि छोटी लेकिन महत्वपूर्ण नदियों के अस्तित्व और इको सेंसेटिव जोन को बचाने के लिए एक विधेयक पारित किया जाए। साथ मंत्रालय द्वारा एक नदी नियमन क्षेत्र की तत्काल अधिसूचना की जरूरत है। 

आपदा में हजारों जानें गईं

hydro power project reason for uttarakhand flood

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के एस राधाकृष्णन और दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि हम हाल ही में हुई त्रासदी से बेहद चिंतित है जिसने उत्तराखंड के चार धाम इलाके को प्रभावित किया है और जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और संपत्ति का नुकसान हुआ है।

इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार को यह पता लगाने का निर्देश दिया था कि क्या 24 प्रस्तावित परियोजनाओं से अलकनंदा और भागीरथी नदियों के तट पर जैवविविधता पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

पीठ ने कहा कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया जाता है।

जिसमें राज्य सरकार के साथ ही भारतीय वन्यजीव संस्थान, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय जल आयोग और दूसरी विशेषज्ञ संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए जो विस्तृत अध्ययन करके यह पता लगाएं कि मौजूदा और निर्माणाधीन पन बिजली परियोजनाओं का पर्यावरण क्षरण में योगदान रहा है और यदि ऐसा है तो किसी सीमा तक यह हुआ है और क्या मौजूदा जून के महीने में उत्तराखंड में आई आपदा में इसका योगदान रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed