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उत्तराखंड आपदा: तबाही के मंजर का जिम्मेदार कोई और भी था!

Wed, 06 Jan 2016 01:33 PM IST
संदीप थपलियाल/अमर उजाला, श्रीनगर (पौड़ी)
संदीप थपलियाल/अमर उजाला, श्रीनगर (पौड़ी) Updated Wed, 06 Jan 2016 01:33 PM IST
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hydro power project is the factor of uttarakhand disaster.

उत्तराखंड में जून 2013 में जलप्रलय प्राकृतिक घटना थी लेकिन इससे हुआ नुकसान मानवजनित था। बाढ़ में मलबे से तबाह हुई बस्तियों में जल विद्युत परियोजनाओं का मलबा घुसने से लोग बेघर हो गए। भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला अहमदाबाद में कराए गए जियोकेमिकल टेस्ट (भू-रसायन परीक्षण) में यह साबित हुई है।

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मालूम हो कि 16/17 जून को जलप्रलय से उत्तराखंड की अलकनंदा और मंदाकिनी घाटी में व्यापक तबाही मची थी। आपदा के दौरान बहकर आई रेत, मिट्टी और पत्थरों में सैकड़ों स्थानीय निवासियों के भवन दब गए या बह गए। लोगों का कहना था कि परियोजनाओं के मलबे के कारण उनको बेघर होना पड़ा जबकि परियोजना निर्माण कंपनियों का दावा था कि परियोजनाओं के कारण नुकसान की तीव्रता कम हुई।
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हकीकत जानने के लिए वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं की टीम ने वैज्ञानिक आधार पर इसका परीक्षण करने का निर्णय लिया।

जियोकेमिकल टेस्ट से सामने आई सच्चाई

hydro power project is the factor of uttarakhand disaster.

वैज्ञानिकों ने चोराबाड़ी से रुद्रप्रयाग (मंदाकिनी घाटी) और खीरोगाड़ से बागवान (अलकनंदा घाटी) के बीच विभिन्न स्थानों पर जमा मलबे और परियोजनाओं के डंपिग जोन में बाढ़ के बाद बचे हुए मलबे के नमूने लिए।

इनका प्रयोगशाला में जियोकेमिकल टेस्ट कराया गया। प्रयोगशाला में डंपिग जोन और प्रभावित क्षेत्रों के नमूने मैच हो गए। इससे यह साबित हुआ है कि परियोजनाओं का मलबा ही बस्तियों की बर्बादी का जिम्मेदार है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
जहां भी परियोजना निर्माणाधीन थी या बन चुकी हैं, उसके समीप की बस्तियों में नुकसान ज्यादा पहुंचा। मसलन मंदाकिनी नदी में कुंड नामक स्थान में परियोजना बनाई जा रही है, इससे नजदीक के क्षेत्र चंद्रापुरी, स्यालसौड़ और विजयनगर में मलबे ने काफी नुकसान पहुंचाया। ऐसे ही श्रीनगर में कोटेश्वर में परियोजना लगभग बन चुकी थी, इसके मलबे ने श्रीनगर के लोअर भक्तियाना क्षेत्र को तबाह कर दिया।
-प्रो. वाईपी सुंदरियाल, केंद्रीय विवि श्रीनगर के भूविज्ञानी और वैज्ञानिकों की टीम के सदस्य

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