दहेज के लिए पत्नी को उतारा था मौत के घाट, कोर्ट ने सुनाई 10 साल सश्रम कारावास की सजा
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उत्तराखंड में कोटद्वार के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिभा तिवारी की अदालत ने ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2014 में हुए पवनरेखा दहेज हत्याकांड में मृतका के पति को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
मामले में अन्य आरोपी मृतका की सास, ससुर और नौकर को कोर्ट ने सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। पीड़ित पक्ष के आग्रह पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यह मामला ऊधमसिंह नगर जिले से पौड़ी जिला न्यायालय को ट्रांसफर किया था। पौड़ी जिला जज कोर्ट ने यह मामला कोटद्वार स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय को हस्तांतरित कर दिया था।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र सिंह रावत ने बताया कि अजबपुर कला देहरादून निवासी शक्ति प्रसाद पुत्र दीपचंद ने वर्ष 2014 में काशीपुर थाने में अपनी बहन पवनरेखा की दहेज के लिए हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट काशीपुर की ओर से 13 अक्टूबर, 2014 को यह मामला सत्र परीक्षण विचारण के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऊधमसिंह नगर को भेजा गया था। तब पीड़ित पक्ष के आग्रह पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 19 अगस्त, 2016 को यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पौड़ी जिले में ट्रांसफर कर दिया।
तहरीर में मृतका के भाई शक्ति प्रसाद ने बताया था कि उनकी बहन पवनरेखा का विवाह 28 सितंबर, 2009 को सतेंद्र प्रकाश जोगियाल पुत्र मूर्तिराम निवासी काशीपुर के साथ हिंदू रीति रिवाज के साथ हुआ था। विवाह में उन्होंने अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दहेज दिया।
ससुरालियों की मांग पर कार भी दहेज में दी गई, लेकिन विवाह के दो हफ्ते बाद से दहेज कम लाने पर उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया गया। लगातार उत्पीड़न के चलते ससुरालियों के साथ लिखित में समझौता भी हुआ था, लेकिन उत्पीड़न की घटनाएं नहीं रुकी। आरोप लगाया कि 11 जनवरी, 2014 की रात पूर्व नियोजित षड्यंत्र के साथ उसकी गला घोटकर हत्या कर दी गई। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मामले में 12 गवाह पेश किए गए थे।
दोनों पक्षों की दलीलें और पत्रावलियों पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिभा तिवारी की अदालत ने मृतका के पति सतेंद्र प्रकाश जोगियाल को दस साल के सश्रम कारावास से दंडित करने की सजा सुनाई, जबकि मामले के अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।