उत्तराखंड में यहां जमीन में दबी हैं सैकड़ों जिंदा मिसाइल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड यूएस नगर के पांच गांवों की करीब 20 हजार की आबादी की सांसें बारूद के ढेर पर हैं। जसपुर के पतरामपुर में 555 छोटी और बड़ी जिंदा मिसाइलें अब तक दफन हैं। एक भी मिसाइल बड़ी तबाही ला सकती है। एसएसपी ने बुधवार को मिसाइलों को निष्क्रिय करने का प्रस्ताव प्रदेश के गृह मंत्रालय को भेजा है।
21 दिसंबर 2004 को क्षेत्र की एक स्टील फैक्ट्री में स्क्रेप के साथ बड़ी तादाद में मिसाइलें आ गई थीं। मिसाइलों की खेप में से एक मिसाइल में विस्फोट से एक कर्मचारी की मौत और कई लोग घायल हो गए थे। इस हादसे के बाद 22 दिसंबर 2004 को जब पुलिस ने पूरे फैक्ट्री परिसर की तलाशी ली तो को फैक्ट्री परिसर से 67 बड़ी और 488 छोटी जिंदा मिसाइलें मिली थीं।
इसके बाद पूरे पुलिस प्रशासन सहित राजधानी देहरादून तक इस घटना ने चौका दिया था। जिले में इतने बड़े पैमाने पर मिलीं जिंदा मिसाइलों को निष्क्रिय करने के लिए पुलिस मुख्यालय देहरादून ने एनएसजी से मदद मांगी थी। उस दौरान एनएसजी की टीम के निर्देश पर पुलिस ने सभी 555 जिंदा मिसाइलों को पतरामपुर क्षेत्र में एक बड़ा गड्डा खोदकर रेत में दफन कर दिया था।
जिंदा मिसाइलें दफन होने की चर्चा से सिहर उठते हैं लोग
तब से आज तक इन मिसाइलों की सुरक्षा के लिए पतरामपुर में पुलिस की एक पिकेट तैनात है, ताकि इनके साथ कोई छेड़छाड़ न कर सके। पतरामपुर ग्रामसभा के अंतर्गत पांच गांव पतरामपुर, निवार मंडी, सीपका, कल्याणपुर और भोगपुर डैम के लोग भारी तादात में जिंदा मिसाइलें दफन होने की चर्चा भर से सिहर उठते हैं।
इन मिसाइलों को निष्क्रिय करने के लिए एनएसजी की टीम ने पुलिस मुख्यालय से सेफ्टी फ्यूज इलेक्ट्रिक डेटोनेटर और एक्सप्लोसिव डाइनेमो सहित 13 उपकरण और सामग्रियों की मांग की थी, लेकिन 10 साल बाद भी पुलिस मुख्यालय एनएसजी की टीम को ये उपकरण और सामग्रियां उपलब्ध नहीं करा पाया।
एसएसपी केवल खुराना कहते हैं कि सुरक्षा के लिए एक गारद तैनात है। जब तक मिसाइलें जिंदा हैं, तब तक खतरा बना हुआ है। सभी मिसाइल को निष्क्रिय करने के लिए प्रदेश के गृह मंत्रालय को बुधवार को पत्र लिखा गया है। मिसाइलों को निष्क्रिय किया जाना बेहद जरूरी है।
मिसाइल की सुरक्षा पर खर्च हो रहे लाखों
पतरामपुर क्षेत्र में दफन जिंदा मिसाइलों की सुरक्षा के लिए सरकार को हर साल लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। मिसाइलों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो, इसलिए पुलिस की एक पिकेट वहां हर समय तैनात रहती है, जिस पर बेवजह खर्चा हो रहा है।