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आईएसबीटी में खुदाई के दौरान मिली इंसानी हड्डियां

Thu, 11 May 2017 04:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी
ब्यूरो/अमर उजाला,हल्द्वानी Updated Thu, 11 May 2017 04:14 PM IST
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Human bones found during Digging of land in haldwani
खुदाई के दौरान मिली इंसानी हड्डियां - फोटो : amarujala

हल्द्वानी में गौला नदी से सटी आईएसबीटी की जमीन पर खुदाई में निकले कब्रनुमा चबूतरों की गुत्थी सुलझ नहीं रही है। इनमें मिली हड्डियां ज्यादातर बच्चों की है। कब्रों को सहेजने और सत्यता का पता लगाने में प्रशासन की रुचि नहीं है। मामला सामने आने के बाद भी न तो इतिहासकारों की टीम को बुलाई न ही अफसरों ने खुद निरीक्षण किया। इतिहासकार भी सटीक टिप्पणी करने से परहेज कर रहे हैं।

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आठ हेक्टेयर रिजर्व वन भूमि के इलाके में इंटर स्टेट बस टर्मिनल (आईएसबीटी) का काम हो रहा है। कार्यदायी संस्थान नागार्जुन ने जब वन भूमि को समतल करने के लिए खुदाई का काम किया तो वहां हडि्डयां निकलनी शुरू हो गईं। पहले तो इसे हल्के में लिया गया लेकिन मंगलवार को कब्रनुमा चबूतरे निकलने लगे।
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कब्रिस्तान होने के संदेह में खुदाई कर रहे मजदूर डर गए और सुपरवाइजर को इसकी सूचना दी। इसके बाद कार्यदायी संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर ने भी निरीक्षण किया और काम पर रोक लगा दी। बुधवार को बनभूलपुरा थाना पुलिस ने उस स्थान का मौका मुआयना किया जहां बच्चों की कब्रें ज्यादा मिली हैं। पुलिस को एक बच्चे की खोपड़ी की हड्डी भी पड़ी मिली। पुलिस ने इसका पंचनामा भरकर कब्जे में ले लिया है। बाद में कब्रों की रिपोर्ट आला अफसरों को दी। 

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... तो अहमद खान और साथियों की हैं कब्र

Human bones found during Digging of land in haldwani
निरीक्षण करती पुलिस टीम - फोटो : amarujala

पुराने जानकार निसार अहमद अंसारी का कहना है कि 1857 में आजादी के पहले संग्राम के दौरान मेरठ में जन्मे मोहम्मद अहमद खान ने अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठा ली। उन्होंने अंग्रेजों को हरा कर अल्मोड़ा तक फतह हासिल कर ली थी। करीब छह से सात माह तक शासन भी किया।

बाद में अंग्रेजों ने गोरखों संग मिलकर अहमद खान और उनके साथियों की हत्या कर दी थी। इनको यहीं दफना दिया गया था। उन्होंने सीमेंट की कब्रों के बारे में कहा कि तीस साल पूर्व जंगल को घेरा गया था उसी दौरान वहां ऐसी कब्रें बना दी गई होंगी।  जल्द ही जंगलात ने कब्जा हटा दिया तो यह भी भूली बिसरी यादें हो गईं जो अब दुबारा खुदाई में मिली हैं।

ये हैं अनसुलझे सवाल
- अगर कब्रनुमा चबूतरे सौ-दो सौ साल पुराने हैं तो कब्रों पर सीमेंट कहां से आया जबकि सौ साल पहले सीमेंट का इस्तेमाल नहीं होता था।
- आईएसबीटी से सटे स्टेडियम में एक भी कब्रनुमा चबूतरा क्यों नहीं मिला
- पानी के तेज बहाव और पत्थरों के टकराव के बाद भी आकृति में बदलाव क्यों नहीं आया, सभी नए लग रहे हैं।
-  छोटी कब्रों की संख्या अधिक क्यों है। कहीं ये महामारी मृत उन बच्चों के तो नहीं हैं जिन्हें दफनाया गया था।

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