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‘हम दिल दे चुके सनम’ के इस स्टार को भा गया पिथौरागढ़, पीछे है यह वजह
विपिन खर्कवाल/ अमर उजाला, झूलाघाट (पिथौरागढ़)
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:21 PM IST
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anil mehta
- फोटो : amar ujala
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‘हम दिल दे चुके सनम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके मशहूर सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता को देवभूमि उत्तराखंड की यह जगह बेहद पसंद आई है।
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अनिल मेहता ने अमर उजाला से कहा 'मैं, दिबाकर और यशराज फिल्म्स की आर्ट डायरेक्टर अपर्णा सूद अक्तूबर में यहां आए थे। टेक्निकल रेकी के बाद मुझे यह जगह एकदम आर्गेनिक लगी। कहानी के मुताबिक खूबसूरत झूला पुल यहां पर था ही और साथ ही एक दिन में कई रंग बदलता मौसम भी था। मैंने पहली बार यहीं देखा, गहरे गुलाबी मकान और हर उम्र के इंसान। अब ये ही इसकी पहचान बनेंगे।
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‘हम दिल दे चुके सनम’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके मशहूर सिनेमेटोग्राफर अनिल मेहता ने कुछ इस अंदाज में झूलाघाट और पिथौरागढ़ को बयां किया। अनिल अब तक इंडस्ट्री के लगभग सभी फिल्मकारों के साथ काम कर चुके हैं। उनके कैमरे का जादू अब तक ‘लगान’, ‘साथिया’, ‘कल हो न हो’, ‘वीर-जारा’, ‘कभी अलविदा न कहना’, ‘रॉकस्टार’ और इस साल आई आमिर खान की ‘सीक्रेट सुपरस्टार’ में भी दिख चुका है। ऊर्जा से लबरेज और चेहरे पर मंद मुस्कान लिए मेहता झूलाघाट को यशराज और दिबाकर बनर्जी प्रोडक्शन की नई खोज मानते हैं।
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खुलकर अपने अनुभवों को साझा किए
Parineeti Chopra
‘संदीप और पिंकी’ फरार के क्लाइमेक्स सेट पर उन्होंने खुलकर अपने अनुभवों को साझा किया। उनसे बातचीत के कुछ अंश-
-आपने विश्व के लगभग सभी महाद्वीपों के पहाड़ और प्रकृति को देखा है। कुमाऊं में आपकी आंखों ने क्या कुछ अलग देखा?
- पहाड़ तो सब जगह के एक से ही हैं, हां यहां पहली बार आया हूं तो यही इसकी खासियत है। एक नई खोज सा लगता है यह। एकदम आर्गेनिक है और अब तक अनछुआ है। दिन भर रंग बदलता मौसम इसे औरों से जुदा करता है।
- एक लैंस मैन किसी जगह की तलाश में किन पहलुओं को सबसे अधिक तरजीह देता है?
- फिल्म बनाना एक ट्रिक है। कोई भी सिनेमेटोग्राफर कथानक के लिए ऐसी जगह तलाशता है जो एकदम प्राकृतिक हो। मतलब उसे कम से कम सेटअप तैयार करना पड़े। स्टोरी के हिसाब से झूलाघाट में वो बात थी। हमने यहां पर कुछ भी बदलाव नहीं किए। जो हम चाह रहे थे वह यहां प्रकृति ने पहले से ही सेट किया था।
- आपको झूलाघाट की क्या चीज सबसे अधिक याद आएगी?
- गहरे गुलाबी मकान और हर उम्र के इंसान की मौजूदगी ही यहां की पहचान बनेगी। प्राचीन और नवीन का अद्भुत संगम है यहां। पुराने बर्तन, गर्मी और सर्दी का मिलाजुला कैनवास और साथ ही कस्बे की लय और गति सिल्वर स्क्रीन पर धूम मचा देगी।
-आपने विश्व के लगभग सभी महाद्वीपों के पहाड़ और प्रकृति को देखा है। कुमाऊं में आपकी आंखों ने क्या कुछ अलग देखा?
- पहाड़ तो सब जगह के एक से ही हैं, हां यहां पहली बार आया हूं तो यही इसकी खासियत है। एक नई खोज सा लगता है यह। एकदम आर्गेनिक है और अब तक अनछुआ है। दिन भर रंग बदलता मौसम इसे औरों से जुदा करता है।
- एक लैंस मैन किसी जगह की तलाश में किन पहलुओं को सबसे अधिक तरजीह देता है?
- फिल्म बनाना एक ट्रिक है। कोई भी सिनेमेटोग्राफर कथानक के लिए ऐसी जगह तलाशता है जो एकदम प्राकृतिक हो। मतलब उसे कम से कम सेटअप तैयार करना पड़े। स्टोरी के हिसाब से झूलाघाट में वो बात थी। हमने यहां पर कुछ भी बदलाव नहीं किए। जो हम चाह रहे थे वह यहां प्रकृति ने पहले से ही सेट किया था।
- आपको झूलाघाट की क्या चीज सबसे अधिक याद आएगी?
- गहरे गुलाबी मकान और हर उम्र के इंसान की मौजूदगी ही यहां की पहचान बनेगी। प्राचीन और नवीन का अद्भुत संगम है यहां। पुराने बर्तन, गर्मी और सर्दी का मिलाजुला कैनवास और साथ ही कस्बे की लय और गति सिल्वर स्क्रीन पर धूम मचा देगी।